चंडीगढ़ , मार्च 14 -- पारिवारिक विवादों को सुलझाने में मध्यस्थता की अहम भूमिका का एक सकारात्मक उदाहरण पंचकूला परिवार न्यायालय में देखने को मिला, जहां पति-पत्नी के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद सौहार्दपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया।
जानकारी के अनुसार, इस दंपति का विवाह वर्ष 2013 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था और उनकी दो बेटियां हैं। समय बीतने के साथ दोनों के बीच गलतफहमियां और आपसी संवाद की कमी के कारण रिश्तों में तनाव पैदा हो गया। बढ़ते विवाद के चलते दोनों पक्षों ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत परिवार न्यायालय में याचिका दायर कर दी थी।
मामले की संवेदनशीलता और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने इस विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत कराई गई, जिसमें आपसी मतभेदों को समझने और सुलझाने का प्रयास किया गया।
लगातार संवाद और सकारात्मक प्रयासों के परिणामस्वरूप पति-पत्नी अपने मतभेद दूर करने में सफल रहे। अंततः दोनों पक्ष राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सहमति से समझौते पर पहुंच गए और लंबे समय से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया।
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