अमृतसर , मई 09 -- पंजाब के अमृतसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में शनिवार को जिला विधि सेवा प्राधिकरण की जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जतिंदर कौर के कुशल नेतृत्व और अमृतसर स्थित जिला विधि सेवा प्राधिकरण के सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ श्रेणी) सह सचिव अमरदीप सिंह बैंस की देखरेख में राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया।

लोक अदालत में वादियों, अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, बैंकों, बीमा कंपनियों, सरकारी विभागों और विभिन्न हितधारकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य आपसी सहमति से विवादों का निपटारा कर लोगों को सस्ता, त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना रहा।

राष्ट्रीय लोक अदालत के सुचारु संचालन के लिए जिला अमृतसर में 15 बेंच, जबकि अजनाला और बाबा बकाला साहिब में 2-2 बेंच गठित किए गए। न्यायिक अधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं और अदालत कर्मचारियों ने समर्पण भाव से कार्य किया।लोक अदालत के दौरान अमृतसर, अजनाला और बाबा बकाला साहिब में कुल 24,554 मामलों को सुनवाई के लिए लिया गया, जिनमें से 22,930 मामलों का आपसी समझौते और सुलह के माध्यम से निपटारा किया गया। विभिन्न बेंचों द्वारा कुल लगभग Rs.50,79,61,261 की राशि के समझौते किए गए। इनमें अमृतसर जिला में 21,950 मामलों का निपटारा हुआ, जिनमें 48,61,66,451 रुपए की राशि शामिल रही। अजनाला में 533 मामलों का 1,30,86,217 रुपए तथा बाबा बकाला साहिब में 447 मामलों का 87,08,593 रुपए की राशि के साथ निपटारा हुआ।

जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने भी सक्रिय भूमिका निभाई और कई विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने में सहयोग दिया। महिला काउंसलिंग सेल ने भी वैवाहिक और पारिवारिक मामलों के समाधान में अहम योगदान दिया। लोक अदालत में कई प्रेरणादायक मामले सामने आए। घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत वर्ष 2019 से लंबित एक मामला प्रियंका शर्मा की अदालत में सुलझाया गया, जिसमें 60 वर्ष से अधिक आयु के दंपति ने आपसी सहमति से विवाद समाप्त किया और महिला अपने पति व पुत्र के साथ घर लौट गई। वर्ष 2022 से लंबित किरायेदारी विवाद किरणदीप कौर की अदालत में सुलझाया गया, जिसमें प्रतिवादी ने वादी को सुरक्षा राशि लौटाने पर सहमति दी। 7.50 लाख रुपए की रिकवरी से जुड़े एक अन्य मामले में अरुण थापा की अदालत में 6.60 लाख पर समझौता हुआ और प्रतिवादी के वेतन से मासिक कटौती के आदेश जारी किए गए।

इसी प्रकार स्पर्श परी की अदालत में घरेलू हिंसा, बैंक रिकवरी, किराया विवाद और स्थायी निषेधाज्ञा से जुड़े कई मामलों का भी समाधान किया गया।

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