पटना , अप्रैल 27 -- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के विशेष पर्यवेक्षक उमाकांत की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन किया गया।

इस दौरान मानवाधिकार, जनहित, प्रशासनिक संवेदनशीलता तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया। श्री उमाकांत ने विभागीय पदाधिकारियों को संवेदना के साथ जनहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्यों में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का विशेष महत्व है। आमजन के अधिकारों की रक्षा तथा उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पदाधिकारियों को तत्परता और सहानुभूति के साथ कार्य करना चाहिए।

श्री उमाकांत ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण क्षेत्र में शासन और जनसेवा की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। ऐसे में विभागीय पदाधिकारियों की भूमिका केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सेवाओं, सुविधाओं और न्यायपूर्ण व्यवहार को सुनिश्चित करना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर श्री उमाकांत ने जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियां आज मानवाधिकारों से भी प्रत्यक्ष रूप से जुड़ चुकी हैं। स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित जीवन और सतत विकास की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।उन्होंने विभागीय पदाधिकारियों से ग्राम पंचायत स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, जन-जागरूकता और स्थानीय सहभागिता को बढ़ावा देने की दिशा में सार्थक पहल करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विभागीय कार्यप्रणाली में मानवीय दृष्टिकोण को और अधिक सशक्त बनाना तथा जनसेवा को संवेदनशील, उत्तरदायी एवं पर्यावरण-सम्मत बनाना रहा।

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