तिरुवनंतपुरम , जनवरी 31 -- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने केरल के स्थानीय स्वशासन विभाग (एलएसजीडी) के लगभग 900 संविदा तकनीकी सहायकों के पदों के सृजन और उनके नियमितीकरण के निर्णय की जांच के आदेश दिये हैं। यह कार्रवाई उन आरोपों के बीच की गयी है कि यह कदम अनुसूचित जाति के आरक्षण नियमों का उल्लंघन करता है।
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष शाजुमोन वट्टेक्काड के एनसीएससी अध्यक्ष को सौंपे शिकायत पत्र के बाद यह जांच शुरू हुई है। उन्होंने आयोग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था और संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को 'पिछले दरवाजे से की गयी नियुक्ति' करार दिया था।
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने इस संबंध में राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
एनसीएससी ने स्थानीय स्वशासन विभाग के विशेष सचिव को 15 फरवरी तक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है और चेतावनी दी है कि ऐसा न करने पर संविधान के आर्टिकल 338 के तहत मिली न्यायिक शक्ति के तहत कार्रवाई की जायेगी।
शिकायत के मुताबिक, यह विवाद तब शुरू हुआ जब सीटू के महासचिव एलामारम करीम ने स्थानीय स्वशासन विभाग मंत्री एमबी राजेश को पत्र लिखकर उन निविदाकर्मियों को नियमित करने की मांग की थी, जिन्होंने स्थानीय निकाय में 12 साल की सर्विस पूरी कर ली हैइसके बाद स्थानीय स्वशासन विभाग के प्रधान निदेशक ने प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आदेश जारी किया। इसके बाद नियमित नियुक्ति के लिए 452 उम्मीदवारों की पहली सूची भेजी गयी।
श्री वट्टेक्कड़ ने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम मौजूदा अनुसूचित जाति के आरक्षण नियमों का उल्लंघन करता है और अनुसूचित जाति उम्मीदवार, जो कुल उम्मीदवारों के करीब 10 फीसदी हैं, सरकारी नौकरी में उनके सही हिस्से से दूर कर सकता है।
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