नयी दिल्ली , अगस्त 10 -- लोकसभा ने राष्ट्रीय अधिकरण आयोग की स्थापना तथा अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों के चयन एवं नियुक्ति के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और निगरानी तंत्र अपनाने के प्रावधान वाले 'अधिकरण सुधार विधेयक 2026' को बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया।

विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोमवार को हंगामे के बीच विधेयक को सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए पेश करते हुए इसके उद्देश्यों पर कहा कि केंद्र सरकार ने 2015 में अधिकरणों की नियुक्तिकरण की प्रक्रिया शुरू की थी और वित्त अधिनियम, 2017 के माध्यम से कई अधिकरणों को समाप्त या विलय किया गया। हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी ने श्री मेघवाल को सदन में पारित कराने के लिए पेश करने को कहा।

श्री मेघवाल ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह किसी अधिकरण के क्षेत्राधिकार में बदलाव नहीं करता, बल्कि पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने विभिन्न अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल और सेवा शर्तों के लिए नियम बनाए हैं। इसके बाद अधिकरण सुधार (तर्कसंगतता और सेवा की शर्तें) अध्यादेश, 2021 को चार अप्रैल, 2021 को प्रख्यापित किया गया, जिसे बाद में अधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।

श्री मेघवाल ने कहा कि मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ मामले में उच्चतम न्यायालय ने अधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 के कुछ प्रावधानों को संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण और न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के विपरीत मानते हुए रद्द कर दिया था। न्यायालय ने अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल तथा उनकी सेवा शर्तों को नियंत्रित करने वाले मानकों को भी स्पष्ट किया था।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय अधिकरण आयोग की स्थापना का भी निर्देश दिया था। प्रस्तावित आयोग अधिकरणों के प्रशासन तथा अध्यक्षों और सदस्यों के चयन एवं नियुक्ति के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और निगरानी तंत्र अपनाएगा। राज्य मंत्री ने कहा कि मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2026) के फैसले के अनुपालन में अधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 को निरस्त करने और अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 को पुनर्स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है।

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