बैतूल , जुलाई 26 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति भवन के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो वर्ष बाद अपने पति का मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया। दस्तावेज के अभाव में महिला सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने में असमर्थ थी।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार आमला तहसील के ग्राम भयावाड़ी निवासी कलसिया उइके के पति धनसू उइके वर्ष 2023 में मजदूरी के लिए असम गए थे। नौ अक्टूबर 2023 को असम के डिब्रूगढ़ जिले के लेगोटिया क्षेत्र में नदी में डूबने से उनकी मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद उनका अंतिम संस्कार वहीं कर दिया गया, लेकिन मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं होने से परिवार को करीब दो वर्ष तक प्रशासनिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

मृत्यु प्रमाण पत्र के अभाव में कलसिया उइके पति की मृत्यु से संबंधित सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रही थीं। विभिन्न स्तरों पर प्रयास विफल रहने के बाद आमला के भाजपा कार्यकर्ता शफी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया और पीड़ित महिला को न्याय दिलाने की मांग की।

राष्ट्रपति सचिवालय ने शिकायत को असम सरकार को भेजा। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा के कार्यालय के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। डिब्रूगढ़ जिला प्रशासन ने आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया, जिसे रविवार को कलसिया उइके को सौंप दिया गया।

आमला तहसीलदार ऋचा कौरव ने बताया कि नियमों के अनुसार मृत्यु प्रमाण पत्र उसी राज्य द्वारा जारी किया जाता है, जहां व्यक्ति की मृत्यु हुई हो। चूंकि धनसू उइके की मृत्यु असम में हुई थी, इसलिए प्रमाण पत्र वहीं के प्रशासन द्वारा जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि यदि दुर्घटना मध्यप्रदेश में हुई होती तो मृतक के आश्रित को आरबीसी 6-4 के तहत चार लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सकती थी। अब आर्थिक सहायता का मामला असम सरकार के नियमों के अनुसार तय होगा।

मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने के बाद कलसिया उइके ने डिब्रूगढ़ जिला प्रशासन, असम सरकार तथा सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

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