अगरतला , जनवरी 27 -- गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित हाई-टी में उत्तर-पूर्व भारत की समृद्ध और विविध पाक परंपरा को विशेष सम्मान मिला।

कार्यक्रम में क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों को परोसा गया, जिससे उत्तर-पूर्वी राज्यों की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय मंच पर उभरकर सामने आई।

हाई-टी मेन्यू में त्रिपुरा की प्रसिद्ध माताबाड़ी पेड़ा और पाटिसप्त पिठा, मणिपुर की ब्लैक राइस खीर, असम की नारिकोल लारू, तिल पिठा और तिल लारू, तथा अरुणाचल प्रदेश की पारंपरिक मिठाई खाप्से शामिल रहीं। इन व्यंजनों ने उत्तर-पूर्व भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और गैस्ट्रोनॉमिक विरासत को खूबसूरती से दर्शाया। माताबाड़ी पेड़ा, जिसे जीआई टैग प्राप्त है और जिसका संबंध ऐतिहासिक त्रिपुरेश्वरी (माताबाड़ी) मंदिर से जुड़ा है, त्रिपुरा की गहरी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक कारीगरी का प्रतीक है। अपने कैरामेलाइज्ड स्वाद, इलायची की खुशबू और मुलायम बनावट के लिए प्रसिद्ध यह मिठाई कई महिलाओं की आजीविका का भी आधार है।

त्रिपुरा और बंगाली-बहुल क्षेत्रों की लोकप्रिय शीतकालीन मिठाई पाटिसप्त पिठा, जिसे चावल के आटे और सूजी से बनाकर नारियल व गुड़ से भरा जाता है, ने समारोह में उत्सव का रंग भरा। वहीं मणिपुर और नागालैंड में पर्व-त्योहारों के दौरान प्रचलित ब्लैक राइस खीर, जो आयरन-समृद्ध और ग्लूटेन-फ्री काले चावल से बनाई जाती है, भी मेहमानों को परोसी गई।

असम की नारिकोल लारू और तिल आधारित व्यंजन राज्य की पारंपरिक मिठाई संस्कृति को दर्शाते हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश की खाप्से-मक्खन युक्त आटे से हाथ से आकार देकर बनाई जाने वाली मिठाई-तिब्बती नववर्ष के दौरान विशेष रूप से लोकप्रिय है।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने इस अवसर को उत्तर-पूर्व भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन के मेन्यू में इन व्यंजनों को शामिल किया जाना क्षेत्र की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त करता है। उन्होंने कहा कि यह गणतंत्र दिवस जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक अवसर पर त्रिपुरा की सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करने वाला ऐतिहासिक पल है।

इस पहल को उत्तर-पूर्व भारत की स्वदेशी खाद्य परंपराओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक सकारात्मक और स्वागतयोग्य कदम माना जा रहा है। राष्ट्रपति भवन में त्रिपुरा की पारंपरिक मिठाइयों की उपस्थिति ने न केवल राज्य की पाक विरासत का उत्सव मनाया, बल्कि गणतंत्र दिवस के मूल भाव-एकता में विविधता-को भी सुदृढ़ किया।

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