नयी दिल्ली , अक्टूबर 09 -- इंडिया गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सौंपे ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर तत्काल रोक लगाने, मतदाता सूचियों से हटाये गये 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करने और सभी चुनावों में मतपत्रों से मतदान कराने की मांग की है।
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने शुक्रवार को यहां राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जिसमें आरोप लगाया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रणाली तथा देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया है और करोड़ों लोगों को उनके मतदान के संवैधानिक अधिकार से वंचित किया है। उन्होंने दावा किया है कि कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर वोट चोरी हुई है ,विधानसभा तथा लोकसभा चुनावों में भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और मतदाता सूचियों में हेरफेर किया गया है।
विपक्षी दलों ने हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि इन चुनावों में जनादेश के साथ खिलवाड़ किया गया। ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त पर कथित अनियमितताओं को छिपाने के लिए उच्चतम न्यायालय को गुमराह करने का आरोप भी लगाया गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि मतदान का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 में निहित प्रतिनिधि लोकतंत्र की बुनियाद है और चुनाव आयोग इस अधिकार का संवैधानिक संरक्षक है। विपक्षी दलों ने कहा है कि चुनाव आयोग संविधान के प्रति जवाबदेह है, न कि अपने राजनीतिक आकाओं के प्रति। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी संवैधानिक संस्था को मतदान के अधिकार से जुड़े नियमों में बदलाव करने और अपने फैसलों के लिए जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को आजीवन छूट देने वाले 2023 के कानून को वापस लेने की भी मांग की है। इसके अलावा एसआईआर पर तत्काल रोक लगाने तथा मतदाता सूचियों से कथित तौर पर अवैध रूप से हटाये गये सभी 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की गयी है।
ज्ञापन में विपक्षी दलों ने सभी चुनावों में मतपत्रों की व्यवस्था बहाल करने और पिछले दो वर्षों में हुए उन विधानसभा चुनावों को रद्द करने की भी मांग की है, जिनमें उनके अनुसार वोट चोरी के निर्णायक सबूत सामने आये हैं। राष्ट्रपति से इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेने और अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर मांगों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील करते हुए विपक्षी दलों ने कहा है कि जब अन्य सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, तब देश के लोग संविधान की रक्षा के लिए राष्ट्रपति के पद की ओर देखते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से संविधान की रक्षा और नागरिकों के मतदान के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए निर्णायक कदम उठाने का आग्रह किया है।
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