हनुमानगढ़ , जून 01 -- राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के रावतसर में वंदे गंगा जल संरक्षण जन भागीदारी अभियान के तहत सोमवार को दोपहर ग्राम पंचायत 29 डीडब्ल्यूडी में आयोजित सरकारी कार्यक्रम उस समय बड़े हंगामे में बदल गया, जब वर्षों से लंबित पेयजल समस्या और गत दिन की आंधी के बाद बाधित बिजली आपूर्ति को लेकर ग्रामीण आक्रोशित हो गये।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने पंचायत समिति के हॉल के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। अंदर मौजूद अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बाहर नहीं निकलने दिया। पंचायत परिसर में काफी देर तक नारेबाजी होती रही। अधिकारी पिछले दरवाजे से भाग निकले, लेकिन ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के सहायक अभियंता को काबू कर लिया। ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे।
वंदे गंगा जल संरक्षण जन भागीदारी अभियान के आज तहत कृषि विभाग द्वारा ब्लॉक स्तरीय किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में जल संरक्षण, सिंचाई डिग्गी, खेत तलाई, पाइपलाइन, फव्वारा संयंत्र और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जानी थी। कार्यक्रम में जिले के सभी संबंधित विभागों प्रमुख अधिकारी मौजूद थे।
इसी दौरान उपस्थित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022-23 में गांव में लाखों रुपये खर्च करके बनाया गया वाटर वर्क्स और जल शुद्धीकरण संयंत्र अब तक शुरू नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों को ज्ञापन देने और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मांग उठाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। एक वर्ष पहले दिया गया जिला कलेक्टर तक का आश्वासन तक काम नहीं आया। दूसरी ओर तीन दिन पहले आई भीषण आंधी के बाद गांव की बिजली व्यवस्था भी ठप हो गई थी। टूटे हुए तारों और खराब लाइनों के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ग्रामीणों ने सामने आरोप लगाया कि सरकार जल संरक्षण और जनभागीदारी की बात कर रही है, लेकिन गांव में पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा तक नहीं है।
इसी आक्रोश के कारण ग्रामीणों ने बैठक हॉल का मुख्य द्वार बंद कर दिया। काफी देर तक अधिकारी अंदर ही रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाद में कई अधिकारी भवन के पिछले द्वार से बाहर निकल भागे, जिससे ग्रामीणों में और नाराजगी फैल गयी। इसी दौरान ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के सहायक अभियंता राधेश्याम को मौके पर रोक लिया और स्पष्ट कर दिया कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक उन्हें नहीं जाने दिया जाएगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नोहर से जलदाय विभाग के अधिशासी अभियंता मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की। बातचीत के बाद विभाग की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया। लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही ग्रामीण शांत हुए और कई घंटों से चला गतिरोध समाप्त हो सका।
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