श्रीगंगानगर , जून 30 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले में रायसिंहनगर क्षेत्र के किसान एक बार फिर आर्थिक शोषण की भेंट चढ़ते नजर आ रहे हैं।

एक निजी फाइनेंस कंपनी पर लगे गंभीर आरोपों ने स्थानीय कृषि समुदाय को हिलाकर रख दिया है। किसानों का दावा है कि कंपनी ने रिण की किस्तें ऑनलाइन जमा करने के बावजूद सिस्टम खराब होने का बहाना बनाकर नकद राशि वसूल ली, लेकिन कोई रसीद नहीं दी। अब किसान संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

किसान नेता रणजीतसिंह राजू ने मंगलवार को श्रीगंगानगर में पत्रकारों को बताया कि इस कंपनी ने रायसिंहनगर क्षेत्र के कई किसानों और खाताधारकों को लोन उपलब्ध कराए थे। कई किसानों ने ईमानदारी से अपनी किस्तें ऑनलाइन माध्यम से जमा कर दीं, लेकिन कंपनी के कर्मचारियों ने बाद में "ऑनलाइन सिस्टम खराब" बताकर उनसे नगद रुपये वसूल लिए। जब किसान नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनओसी) लेने पहुंचे तो कंपनी के कैशियर, मैनेजर और अन्य अधिकारियों ने टालमटोल का रवैया अपनाया। किसानों का आरोप है कि इस पूरे मामले में कंपनी के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत है, जिसके चलते करोड़ों रुपये गबन कर लिये गये।

किसान नेता कालूराम थोरी के अनुसार-सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि नकद भुगतान करने वाले किसानों को न तो कोई रसीद दी गई और न ही कोई लिखित पुष्टि की गई। किसानों का कहना है कि यह एक सुनियोजित धोखाधड़ी है, जिसका मकसद जानबूझकर किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाना है। कई किसान अब रिण समापन का प्रमाण नहीं दिखा पा रहे हैं, जिससे उनके क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ रहा है और आगे रिण लेने में दिक्कत हो रही है।

संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों ने अतिरिक्त जिला कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की।

किसानों ने स्थानीय थाना प्रभारी को भी शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कंपनी की स्थानीय शाखा प्रबंधक को एक महीने की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का नोटिस जारी किया है। किसान अब दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई, वसूले गए पैसे की वापसी और कंपनी पर जुर्माना लगाने की मांग कर रहे हैं।

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