रायबरेली। , जुलाई 31 -- स्थानीय कांग्रेस सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर दिए गए बयानों पर रायबरेली में राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा श्री गांधी के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किए जाने के बाद शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में धरना दिया और भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस का धरना पार्टी नेता सुशील पासी के नेतृत्व में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एक दिन पूर्व भाजपा के धरना-प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ सार्वजनिक मंच से अमर्यादित एवं आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत बताते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।

धरने के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों के विरुद्ध तत्काल मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई किए जाने की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में शालीनता और लोकतांत्रिक मर्यादा का पालन सभी की जिम्मेदारी है।

धरने का नेतृत्व करते हुए सुशील पासी ने राज्य और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए समाज में विभाजन की राजनीति कर रही है। उन्होंने युवाओं को रोजगार सहित विभिन्न मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।

गौरतलब है कि बीते गुरुवार को राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने डॉ. भीमराव आंबेडकर चौक (हाथी पार्क) पर धरना-प्रदर्शन किया था। इस दौरान श्री सिंह ने राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए उनके बयानों और राजनीतिक आचरण की आलोचना की थी तथा उन पर संविधान, नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा और रायबरेली की जनता की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया था।

इसी क्रम में जिला कांग्रेस अध्यक्ष पंकज तिवारी ने गुरुवार को शहर कोतवाली में तहरीर देकर तथाकथित अमर्यादित टिप्पणियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किए जाने की मांग भी की थी। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा नेताओं की ओर से सार्वजनिक मंच से की गई तथाकथित अमर्यादित टिप्पणियां कानून के दायरे में जांच का विषय हैं।

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