रायपुर , मार्च 14 -- छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में शनिवार को वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में बड़ी संख्या में लोग अपने लंबित विवादों के समाधान के लिए पहुंचे। यहां आपसी सहमति से आपराधिक, चेक बाउंस, पारिवारिक विवाद, बैंक रिकवरी, विद्युत, राजस्व और यातायात से जुड़े राजीनामा योग्य मामलों का त्वरित निपटारा किया गया।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा ने बताया कि लोक अदालत में समझौते योग्य कई लंबित प्रकरणों को रखा गया था। राजस्व विभाग से जुड़े करीब 12 लाख मामले और नगर पालिका के लगभग 2.5 लाख मामलों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इसके अलावा न्यायालय में 24 हजार से अधिक प्रकरण लंबित हैं, जिनमें से कई मामलों का निराकरण लोक अदालत के माध्यम से किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यातायात से संबंधित ऐसे चालान जिनका भुगतान 90 दिनों के भीतर नहीं हुआ है, उन्हें भी इस लोक अदालत में शामिल किया गया है। इन मामलों का निपटारा न्यूनतम दर पर चालान का भुगतान कर आपसी सहमति से किया जा रहा है।
लोक अदालत के साथ-साथ मोहल्ला अदालत की भी व्यवस्था की गई है, जहां अधिकारी सीधे मोहल्लों में बैठकर नागरिकों की समस्याएं सुन रहे हैं। बिजली, सड़क और पेयजल से जुड़ी शिकायतों का मौके पर ही समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है।
लोक अदालत के माध्यम से मामलों का निपटारा अपेक्षाकृत कम समय में हो जाता है और दोनों पक्षों की सहमति से समाधान निकलता है। ऐसे मामलों में अपील की गुंजाइश नहीं रहती और फैसला अंतिम माना जाता है। दीवानी मामलों में पक्षकारों को कोर्ट फीस वापस मिल जाती है, जबकि बीमा से जुड़े दावा मामलों में राजीनामा होने पर बीमा कंपनियां तत्काल एवार्ड राशि जमा करती हैं। इस व्यवस्था से पक्षकारों को बार-बार अदालत आने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है।
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