रायपुर , मार्च 16 -- छत्तीसगढ़ शासन ने डिजिटल सुशासन को सशक्त बनाने और शासकीय खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। राजधानी रायपुर के सिविल लाइन्स स्थित न्यू सर्किट हाउस में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित इलेक्ट्रॉनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम पर दो दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सोमवार रात शुभारंभ हुआ।

चिप्स और एनआईसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश के सभी विभागों को नवीन ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली से प्रशिक्षित करना है, ताकि सरकारी खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, प्रभावी और तकनीक आधारित बन सके।

कार्यशाला के प्रथम दिवस पर लोक कल्याण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संसाधन, गृह निर्माण और पर्यटन विभाग सहित 50 विभागों के नोडल अधिकारी शामिल हुए। एनआईसी, नई दिल्ली से उप-महासंचालक उषा सक्सेना के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ टीम द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मलिक ने कहा कि प्रदेश में पिछले दस वर्षों से ई-खरीद प्रणाली संचालित है, लेकिन अब एनआईसी द्वारा विकसित नवीन "जेमनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम" की ओर माइग्रेशन एक सशक्त और आधुनिक शुरुआत है। उन्होंने अधिकारियों से इस नई प्रणाली के माध्यम से डिजिटल गवर्नेंस को और मजबूत करने का आह्वान किया।

एनआईसी की उप-महासंचालक एवं ई-प्रोक्योरमेंट ग्रुप प्रमुख उषा सक्सेना ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और समान अवसर सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं। उन्होंने बताया कि जेमनिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम इन सभी मानकों को पूरा करता है और वर्तमान में प्रतिदिन 5 से 6 हजार निविदाओं का सफल संचालन कर रहा है।

छत्तीसगढ़ राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी टी.एन. सिंह ने इसे ई-गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण और व्यापक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली स्केलेबल है और राज्य की जरूरतों के अनुसार कस्टमाइज की गई है, जिसमें उच्च स्तरीय सुरक्षा फीचर्स भी शामिल हैं।

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