रायपुर , अक्टूबर 19 -- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दशहरा पर्व को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। शहर के विभिन्न मैदानों में 20 अक्टूबर को रावण दहन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, रामलीला, भजन संध्या और आतिशबाजी के आयोजन होंगे। इस बीच, बांस, कागज, कपड़ा, पेंट और सजावट की सामग्री महंगी होने से रावण के पुतले तैयार करने की लागत में इस वर्ष करीब 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दूसरी ओर, डब्ल्यूआरएस मैदान में दशहरा उत्सव के दौरान रेलवे ने सुरक्षा के मद्देनजर ट्रेनों की गति सीमित रखने का निर्णय लिया है।
डब्ल्यूआरएस मैदान में 101 फीट ऊंचे रावण का दहन प्रमुख आकर्षण रहेगा। आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए रेलवे, पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन की तैयारियां की हैं। बोरियाखुर्द, रावणभाठा, बूढ़ापारा और शंकर नगर सहित शहर के अन्य क्षेत्रों में भी दशहरा उत्सव आयोजित किए जाएंगे।
रेलवे अधिकारियों से आज मिली जानकारी के अनुसार मैदान में दशहरा उत्सव के दौरान उरकुरा से रायपुर स्टेशन के बीच मंगलवार को ट्रेनें अधिकतम 15 किमी प्रति घंटे की गति से गुजरेंगी। यह व्यवस्था दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे तक प्रभावी रहेगी। लोको पायलट लगातार हॉर्न बजाते हुए ट्रेनों का संचालन करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर ट्रेन रोक भी सकेंगे।
मैदान के समीप मुंबई-हावड़ा रेल लाइन गुजरने के कारण भीड़ के पटरियों तक पहुंचने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए रेलवे ने अतिरिक्त सुरक्षा प्रबंध किए हैं।
रायपुर के सीनियर डीसीएम सुस्कर विपुल विलासराव ने बताया कि दशहरा उत्सव के दौरान हर साल की तरह इस बार भी डब्ल्यूआरएस मैदान के पास ट्रेनों की गति 15 किमी प्रति घंटा रखी जाएगी। ट्रेनें हॉर्न बजाते हुए गुजरेंगी। जरूरत पड़ने पर लोको पायलट ट्रेन रोक सकेंगे।
रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए आरपीएफ और स्थानीय पुलिस के करीब 250 जवान तैनात रहेंगे। पटरियों के आसपास बैरिकेडिंग की जाएगी तथा हर 10 मिनट में माइक से अनाउंसमेंट कर लोगों को रेलवे ट्रैक से दूर रहने की हिदायत दी जाएगी। सुरक्षा बलों द्वारा रेल लाइन पर लगातार निगरानी भी रखी जाएगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेनों की गति सीमित किए जाने से सामान्य परिस्थितियों में करीब 5 मिनट और अधिक व्यस्त समय में 10 मिनट तक की देरी हो सकती है। हालांकि, वास्तविक विलंब परिचालन की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
मैदान में रायपुर और आसपास के जिलों से दर्शकों के पहुंचने का सिलसिला दोपहर से शुरू होने की संभावना है। शाम के समय वाहनों और लोगों की आवाजाही बढ़ने से फाफाडीह से डब्ल्यूआरएस मैदान तक यातायात प्रभावित हो सकता है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें तैनात रहेंगी।
बोरियाखुर्द के खेल मैदान में दशहरा सांस्कृतिक महोत्सव के तहत 45 फीट ऊंचे रावण तथा 30-30 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत दिन में पतंग उत्सव से होगी। दोपहर 4 बजे सांस्कृतिक नृत्य और योग प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
शाम 5 बजे भगवान श्रीराम और माता सीता की पूजा-अर्चना के साथ दीप प्रज्वलन होगा। शाम 5:30 बजे रामलीला का मंचन किया जाएगा। इसके बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन तथा आतिशबाजी होगी। रात 8 बजे उज्जैन के भजन गायक सन्नी अलबेला और उनकी टीम भजनों की प्रस्तुति देगी।
बूढ़ापारा स्थित सप्रे स्कूल मैदान में दशहरा उत्सव शाम 4 बजे भजन जेमिंग के साथ शुरू होगा। इसमें स्थानीय और अन्य भजन गायक भगवान श्रीराम तथा माता दुर्गा के भक्ति गीत प्रस्तुत करेंगे। शाम 6 बजे श्रीराम-लक्ष्मण की झांकी के माध्यम से 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। इसके बाद शाम 6:30 बजे आतिशबाजी होगी।
बूढ़ापारा दशहरा उत्सव समिति पिछले 15 वर्षों से यहां आयोजन कर रही है। समिति की ओर से दर्शकों के बैठने, मंच और रोशनी की व्यवस्था की जा रही है।
रायपुर के रावणभाठा मैदान में नगर निगम की ओर से दशहरा आयोजन के लिए साफ-सफाई, रोशनी, पेयजल और अग्निशमन संबंधी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इस मैदान में भी रावण दहन देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
शंकर नगर के बीटीआई मैदान में खम्हारडीह सार्वजनिक दशहरा और सांस्कृतिक समिति द्वारा उत्सव आयोजित किया जाएगा। तैयारियों की शुरुआत छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने भूमिपूजन कर की। उन्होंने पूजा-अर्चना कर आयोजन की सफलता और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। समिति आयोजन की तैयारियों में जुटी है। हालांकि, यहां रावण के पुतले की ऊंचाई और कार्यक्रम का समय अभी घोषित नहीं किया गया है।
रावण के पुतले तैयार करने वाले कारीगर गोपाल राव के मुताबिक, इस साल पुतला निर्माण की लागत में करीब 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बांस, कागज, रंगीन पेपर, कपड़ा, पेंट और सजावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की कीमतें बढ़ने से कारीगरों का खर्च बढ़ा है।
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