रायपुर , मई 12 -- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित हमर अस्पताल में कथित रूप से एक्सपायरी और कम अवधि वाली दवाइयों की आपूर्ति को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने इस मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार और दवा सप्लाई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने आज अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद दावा किया कि अस्पताल के साथ-साथ छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के वेयरहाउस में भी बड़ी मात्रा में संदिग्ध और गुणवत्ता पर सवाल खड़ी करने वाली दवाइयां पाई गई हैं।

निरीक्षण के बाद विकास उपाध्याय ने आरोप लगाते हुए कहा, "सरकारी अस्पतालों में एक्सपायरी और निकट एक्सपायरी डेट वाली दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है।"उन्होंने यह भी दावा किया कि यह समस्या केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है और यदि प्रदेशभर के अस्पतालों की जांच की जाए तो ऐसे और मामले सामने आ सकते हैं। कांग्रेस नेता ने विशेष रूप से चिंता जताई कि जिन दवाइयों पर सवाल उठ रहे हैं, उनमें नवजात शिशुओं और बच्चों को दी जाने वाली दवाएं भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा, "अगर कम अवधि या एक्सपायरी दवाइयां बच्चों को दी जाएंगी तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।"उपाध्याय ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले भी CGMSC द्वारा सप्लाई किए गए कैल्शियम टैबलेट, मेडिकल किट और अन्य सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ चुके हैं। उनके अनुसार, अस्पतालों में खराब दस्ताने, सिरिंज और अन्य सर्जिकल सामग्री की आपूर्ति के मामले भी पहले सामने आए हैं।

कांग्रेस ने इस पूरे मामले में टेंडर प्रक्रिया और सप्लाई व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया, "दवा कंपनियों और एजेंसियों को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर टेंडर दिए जा रहे हैं।"उन्होंने आगे यह भी दावा किया, "कुछ कंपनियों में भाजपा नेताओं और उनके परिजनों की भूमिका है, इसलिए कार्रवाई नहीं हो रही।"हालांकि इन आरोपों पर फिलहाल राज्य सरकार या सीजीएमएससी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों और कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज की जाए। साथ ही प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की गुणवत्ता की व्यापक जांच कराई जाए।

पार्टी का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में कथित लापरवाही से मरीजों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती है, इसलिए तत्काल और निष्पक्ष जांच जरूरी है।

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