रायपुर , मई 12 -- छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में मंगलवार को "अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान परियोजना" की 33वीं वार्षिक समीक्षा बैठक का शुभारंभ हुआ।

तीन दिवसीय इस बैठक का उद्घाटन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नयी दिल्ली के उप महानिदेशक डॉ. ए. के. नायक ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की।

इस अवसर पर राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर), बरोंडा रायपुर के निदेशक डॉ. पी. के. राय तथा आईसीएआर, नयी दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ. राकेश कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि यह परियोजना देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में फसलों में खरपतवार नियंत्रण पर अनुसंधान, नवीन तकनीकों के विकास तथा उनके किसानों तक प्रसार के उद्देश्य से आईसीएआर, नयी दिल्ली द्वारा जबलपुर स्थित खरपतवार अनुसंधान निदेशालय के माध्यम से संचालित की जा रही है।

मुख्य अतिथि डॉ. ए. के. नायक ने अपने संबोधन में वैज्ञानिकों से रासायनिक खरपतवार नियंत्रण के बजाय समन्वित खरपतवार प्रबंधन प्रणाली अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खरपतवारनाशकों के दुष्प्रभावों को देखते हुए इनके सीमित एवं नियंत्रित उपयोग के साथ-साथ जैविक एवं प्राकृतिक विकल्पों पर अधिक शोध की आवश्यकता है।

उन्होंने सूक्ष्मजीवों, केंचुओं तथा लाभकारी कीटों पर खरपतवारनाशकों के प्रभाव के अध्ययन को भी महत्वपूर्ण बताया और प्राकृतिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि रासायनिक खरपतवारनाशी फसल उत्पादन में प्रभावी हैं, लेकिन इनके अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने यांत्रिक एवं जैविक खरपतवार नियंत्रण विधियों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।

इस दौरान खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर के प्रभारी डॉ. विजय कुमार चौधरी ने परियोजना के तहत देशभर के 17 केंद्रों में चल रही गतिविधियों एवं उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक में वर्ष 2025-26 के वार्षिक प्रतिवेदन सहित विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। साथ ही इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. एस.एस. कोल्हे को खरपतवार प्रबंधन में उल्लेखनीय योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। वहीं पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना को आईसीएआर बेस्ट सेंटर अवार्ड से सम्मानित किया गया।

परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ. श्रीकांत चितले ने धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक में देशभर के 17 प्रमुख केंद्रों, सात स्वयंसेवी केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों तथा हर्बीसाइड उद्योगों के लगभग 100 वैज्ञानिक शामिल हुए।

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