रायगढ़ , फरवरी 21 -- ) छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पुसौर विकासखंड के ग्राम तुरंगा स्थित आर्ष गुरुकुल आश्रम में स्वामी श्रद्धानंद के पावन बलिदान के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 'स्वामी श्रद्धानंद बलिदान महामहोत्सव और राष्ट्र रक्षा महायज्ञ' का शनिवार को भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान तथा छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना 'अरपा पैरी के धार' के साथ हुआ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका उपस्थित रहे। उन्होंने यज्ञ कुंड का दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
इस दौरान श्री डेका ने स्वामी श्रद्धानंद को महान समाज सुधारक, प्रखर शिक्षाविद् और वीर स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद आर्य समाज के प्रमुख स्तंभ थे और स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका रही।
राज्यपाल ने वर्ष 1902 में स्थापित गुरुकुल कांगड़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से स्वामी श्रद्धानंद ने प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति और आधुनिक विषयों का समन्वय प्रस्तुत किया, जो आज भी प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने छुआछूत, जातिवाद और सामाजिक भेदभाव जैसी कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष किया। वे 'शुद्धि आंदोलन' के प्रणेता थे, जिसका उद्देश्य उन लोगों को उनकी मूल सांस्कृतिक पहचान से पुनः जोड़ना था, जो विभिन्न कारणों से उससे दूर हो गए थे।
राज्यपाल ने वर्तमान शिक्षा पद्धति में नैतिक एवं चारित्रिक मूल्यों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं से आह्वान किया कि जीवन का लक्ष्य केवल करियर निर्माण न होकर समाज सेवा और आत्मसंतोष भी होना चाहिए। उन्होंने जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों पर भी प्रकाश डालते हुए प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया।
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