रायगढ़ , जून 17 -- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला जेल में विचाराधीन कैदी संजय बघेल की मौत के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। मामले की जांच के लिए गठित प्रदेश कांग्रेस की छह सदस्यीय समिति ने बुधवार को जिला जेल पहुंचकर घटनाक्रम की जानकारी ली और जेल प्रशासन पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस जांच दल के सदस्यों ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान जेल प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा नहीं कीं और पूछे गए सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दिए। समिति का कहना है कि दौरे की पूर्व जानकारी होने के बावजूद जिला जेल अधीक्षक अवकाश पर चले गए, जबकि उप जेल अधीक्षक ने कई सूचनाएं देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह प्रोटोकॉल के दायरे में नहीं आता।

कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि किसी बंदी की तबीयत बिगड़ने अथवा मृत्यु होने की स्थिति में उसके परिजनों को सूचना देना क्या प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा नहीं है। जांच दल ने दावा किया कि मृतक के शरीर पर चोट के निशान दिखाई दिए तथा चोट लगने के कारणों को लेकर जेल अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास पाया गया। समिति ने आरोप लगाया कि मामले में तथ्य और साक्ष्य छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।

जांच दल ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराए जाने पर भी आपत्ति जताई। साथ ही जिला जेल में क्षमता से अधिक कैदियों को रखे जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक बैरक में निर्धारित संख्या से अधिक बंदियों को रखा जा रहा है, जिससे व्यवस्थाओं और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

कांग्रेस ने मामले की न्यायिक जांच कराने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी, दोनों बेटियों की निशुल्क शिक्षा तथा छोटी बेटी के उपचार का पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किए जाने की मांग भी की गई है।

दल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है तथा मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

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