भदोही , जुलाई 11 -- उत्तर प्रदेश में भदोही जिले के सीतामढ़ी में गंगा तट पर स्थित उड़िया बाबा आश्रम एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र है। जहां लवकुश के जन्मोत्सव पर आयोजित होने वाले रामायण मेले के दौरान यह आश्रम श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है।

जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर काशी- प्रयाग व विंध्य पर्वत मालाओं के बीच अवस्थित महर्षि बाल्मीकि की तपोभूमि एवं लवकुश जन्म स्थली सीतामढ़ी में प्रति वर्ष भव्य नौ दिवसीय राष्ट्रीय रामायण मेले का आयोजन होता है। मेले के दौरान भारी तादाद में पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होती है। इस वर्ष 15 से 23 जुलाई के बीच रामायण मेले का आयोजन हो रहा है।

वैसे तो सीता समाहित आश्रम परिसर में भगवान शिव, माता दुर्गा, गंगा माता, हनुमान जी की 108 फीट ऊंची मूर्ति तथा भैरव की प्रतिमाएं स्थापित हैं, लेकिन उड़िया बाबा आश्रम अपनी अलग पहचान के साथ श्रद्धालु भक्तों की आस्था का केंद्रबिंदु बना रहता है।

उड़िया बाबा के परमशिष्य स्वामी निश्चलानंद ने बताया कि उड़िया बाबा का जन्म वर्ष 1875 में वर्तमान ओडिशा में हुआ था, जबकि उनका महाप्रयाण 1948 में होने के प्रमाण मिलते हैं।

उन्होंने बताया कि उनका बचपन का वास्तविक नाम श्री नारायण दास बताया जाता है। वे सनातन धर्म, वेदांत और भक्ति के प्रचारक थे तथा उन्होंने भारत के अनेक तीर्थों की पदयात्रा की। उनके शिष्यों ने देश के विभिन्न स्थानों पर उनके नाम से आश्रम स्थापित किए। इन्हीं आश्रमों में सीतामढ़ी परिसर स्थित उड़िया बाबा आश्रम को प्रमुख आश्रमों में गिना जाता है। जिसका जीर्णोद्धार वर्ष 1990 के दशक में होना बताया जाता है। अध्यात्म के क्षेत्र में इस महान तपस्वी संत ने काफी बढ़-चढ़ कर प्रचार-प्रसार किया जिसमें अद्वैत वेदांत एवं सनातन धर्म का प्रचार,सरल जीवन, वैराग्य और भक्ति प्रमुख हैं।

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