रामनगर , जनवरी 29 -- उत्तराखंड वन विकास निगम द्वारा आयोजित राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता वार्षिक सम्मेलन संवाद-2026 का आयोजन गुरुवार को रामनगर के आमडंडा क्षेत्र में आयोजित किया। खास बात यह रही कि यह संवाद कार्यक्रम 12 से 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हुआ, जिसमें देश के 20 राज्यों से आए क्रेता शामिल हुए, जो वन निगम से लकड़ी क्रय करते हैं।
सम्मेलन में लकड़ी की दर, निकासी प्रक्रिया, पारदर्शिता और समन्वय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल, वन विकास निगम की प्रबंध निदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्रेता-विक्रेता के बीच रिश्तों को मजबूत करना, व्यापार में पारदर्शिता बढ़ाना, सीधे संवाद का मंच देना और क्रेता की अपेक्षाओं को समझकर उन्हें क्रियान्वित करना रहा। सम्मेलन का नारा "व्यवहार से व्यापार तक" रहा, जिसे व्यापार की बुनियादी आवश्यकता बताया गया।
श्री उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड वन विकास निगम राज्य को बड़ा राजस्व देने वाला एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेशन है। राज्य का लगभग 71 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है। वन विभाग द्वारा आवंटित लकड़ी को निगम काटकर व्यवसायी को उपलब्ध कराता है, जिससे निगम लगातार प्रगति कर रहा है और राज्य को अच्छा राजस्व मिल रहा है। हालांकि, अभी और बेहतर करने की आवश्यकता है।
उन्होंने वियतनाम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लकड़ी उद्योग से कई लाखों डॉलर का निर्यात किया जा रहा है। इसी तर्ज पर उत्तराखंड में वुड-बेस्ड इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने के लिए नई नीति बनाई जा रही है। साथ ही राज्य में मौजूद जड़ी-बूटी की अपार संभावनाओं को देखते हुए, वन पंचायतों के माध्यम से 628 करोड़ रुपये की हर्बल मिशन योजना शुरू की गई है। इसमें वन निगम को जोड़कर बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंकेज तैयार किया जाएगा, जिससे वन पंचायतों की आय बढ़ेगी और स्थानीय लोगों की आजीविका मजबूत होगी।
सम्मेलन के दौरान राजनीतिक सवालों पर भी प्रतिक्रिया देते हुए वन मंत्री ने अंकिता मामले में कहा कि सरकार ने शुरू से ही त्वरित कार्रवाई की, अपराधियों को सजा दिलाई और तथाकथित वीआईपी एंगल पर केन्द्रीय जांच ब्यूरो जांच के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा। उन्होंने कहा कि केवल विरोध के लिए विरोध लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
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