रामगढ़ , अगस्त 12 -- झारखंड के रामगढ़ में महिलाओं एवं बालिकाओं से संबंधित कानूनों, उनके विधिक अधिकारों और उपलब्ध कानूनी सहायता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन व्यवहार न्यायालय, रामगढ़ के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रामगढ़ मो. तौफीकुल हसन के मार्गदर्शन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अनिल कुमार के तत्वावधान में हुआ।

कार्यक्रम का आयोजन 90 दिवसीय जागरूकता एवं आउटरीच अभियान के तहत किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य पीएलवी (पैरा लीगल वॉलंटियर्स) एवं पारा लीगल वॉलंटियर्स को महिलाओं एवं बालिकाओं के अधिकारों तथा उनके संरक्षण से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना था, ताकि वे समाज में जरूरतमंद महिलाओं तक विधिक जानकारी एवं सहायता पहुंचाने में सक्षम हो सकें।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनों एवं प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई। इसमें घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं निवारण) अधिनियम तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित महिलाओं एवं बालिकाओं के विधिक अधिकारों और संरक्षण से जुड़े विषय शामिल रहे।

प्रतिभागियों को निःशुल्क विधिक सहायता, जिला विधिक सेवा प्राधिकार की भूमिका, पीड़ित महिलाओं के लिए उपलब्ध सहायता तथा संबंधित सरकारी योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, उत्पीड़न एवं भेदभाव की घटनाओं में पीड़ितों को उचित विधिक सहायता एवं संबंधित प्राधिकार तक पहुंचाने में पारा लीगल वॉलंटियर्स की भूमिका पर विशेष प्रकाश डाला गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने महिलाओं एवं बालिकाओं से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं कानूनी विषयों पर सवाल पूछे, जिनका प्रशिक्षकों द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान एवं मार्गदर्शन किया गया।

इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रामगढ़ के चीफ एल.ए.डी.सी. सुजीत कुमार सिंह, पारा लीगल वॉलंटियर्स, पीएलवी एवं अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों से अपेक्षा की गई कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त विधिक जानकारी को समाज की महिलाओं एवं बालिकाओं तक पहुंचाकर उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे। साथ ही जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

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