नैनीताल , अगस्त 17 -- उत्तराखंड के रानीखेत में कैंटोनमेंट बोर्ड की भूमि पर कथित अनधिकृत कब्जे को लेकर जारी कारण बताओ नोटिस के मामले में उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष जवाब दाखिल करने की स्वतंत्रता दी है। अदालत ने संबंधित भूमि के कब्जे के संबंध में पांच सप्ताह तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने हीरा सिंह रावत समेत पांच याचिकाओं पर विगत 14 अगस्त को सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए। आदेश की प्रति आज उपलब्ध हो पायी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से रानीखेत कैंटोनमेंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से विगत 01अगस्त को जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी गई जिसमें बोर्ड की ओर से कहा गया कि रानीखेत के धोलीखेत स्थित सर्वे नंबर 102 की बी-3 भूमि के 24.55 वर्गमीटर हिस्से पर याचिकाकर्ता बिना अधिकार कब्जा किए हुए हैं और वे उक्त परिसर के लीजधारक नहीं हैं।
बोर्ड की ओर से अदालत को बताया गया कि हाईकोर्ट के 8 अगस्त 2025 के आदेश के अनुपालन में भूमि का निरीक्षण कराया गया था और निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर नोटिस जारी किया गया। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उन्हें निरीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे वे नोटिस का प्रभावी जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।
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