शिलांग , सितंबर 06 -- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मेघालय के दो दिवसीय दौरे पर सोमवार को 1,010.95 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। अधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।
श्री राधाकृष्णन 12 सितंबर 2025 को उपराष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद पहली बार मेघालय आ रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा, उनके मंत्रिमंडल के सदस्य और राज्य सरकार के अधिकारी मौजूद रहेंगे।
श्री राधाकृष्णन 850.58 करोड़ रुपये की लागत वाली न्यू शिलांग जलापूर्ति योजना के दूसरे चरण की आधारशिला रखेंगे। इसका वित्तपोषण आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के शहरी चुनौती कोष के तहत किया जाएगा।
इस जलापूर्ति योजना के तहत मेघालय में पहली बार स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली शुरू की जाएगी। इसे एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र से जोड़ा जाएगा, जिससे जलापूर्ति की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी। वह मावखानू में 72.50 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 2गुना50 एमवीए, 132/33 केवी विद्युत उपकेंद्र की भी आधारशिला रखेंगे। इसके तहत साइसेईज-मावखानू 132 केवी दोहरे परिपथ वाली विद्युत लाइन और साइसेईज में जीआईएस बे का निर्माण किया जाएगा। परियोजना का वित्तपोषण पीएम-डेवाइन योजना के तहत किया जाएगा और इसका उद्देश्य न्यू शिलांग शहर में स्थिर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
एक अन्य प्रमुख परियोजना के तहत नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं (एनईएसआईडीएस) के अंतर्गत 21.86 करोड़ रुपये की लागत से जोंग्क्शा-खरांग-दिएंगलिएंग-नोंग्रोंग-मूडिममई-वहियाजेर मार्ग पर उमंगोट नदी के ऊपर 110 मीटर लंबे बड़े पुल का निर्माण किया जाएगा।
इस पुल से मावकिनर्यू प्रखंड के 14 गांवों के करीब 28,479 लोगों को लाभ मिलेगा। इससे ईस्ट खासी हिल्स और वेस्ट जैंतिया हिल्स के बीच अंतर-जिला आवागमन बेहतर होगा और शिलांग तथा जोवाई के बीच एक वैकल्पिक सड़क संपर्क भी उपलब्ध होगा।
उपराष्ट्रपति असम के कामरूप मेट्रो जिले की सीमा से लगे री-भोई जिले में पिलांगकू-ए, जिरमांग, चिबरा और मावियोंग होते हुए उमसेन से बारापाथर तक 13.50 किलोमीटर लंबी हर मौसम में उपयोग योग्य सड़क के निर्माण की आधारशिला भी रखेंगे।
वह शिलांग सिविल अस्पताल परिसर में 30 बिस्तरों वाली आयुष स्वास्थ्य सुविधा की आधारशिला भी रखेंगे। इसका उद्देश्य आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, पंचकर्म चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास और भर्ती मरीजों की देखभाल समेत पारंपरिक एवं समेकित स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर करना है।
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