नयी दिल्ली , जनवरी 13 -- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से बचाने और विकसित तथा आत्मनिर्भर भारत दृष्टियोजना को साकार करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि विद्यार्थियों को व्यसन की जगह चरित्र निर्माण चुनकर देश के विकास में अपनी अहम भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
श्री राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए लिखा "दिल्ली विश्वविद्यालय में नशामुक्त परिसर अभियान तथा नशामुक्त शैक्षणिक परिसरों के लिए ई-संकल्प मंच और मोबाइल ऐप का आज शुभारंभ करते हुए कहा कि सशक्त राष्ट्र के लिए सशक्त नेतृत्व की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि विश्वविद्यालय अकादमिक शिक्षा के केंद्र भर नहीं बल्कि ऐसे संस्थान होते हैं जहां मूल्य संस्कारित किए जाते हैं, नेतृत्व पोषित किया जाता है और राष्ट्र का भविष्य गढ़ा जाता है। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय जैसा प्रमुख शिक्षण संस्थान नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के खिलाफ दृढ़ रुख अपनाता है, तो यह समाज को सशक्त संदेश देता है।
विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों से इसमें सक्रियता से भाग लेने और नशा मुक्त परिसर का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भी सुनिश्चित करने को कहा कि नशा मुक्त परिसर अभियान सभी केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों का अभिन्न हिस्सा बने। उन्होंने भारत को युवा ऊर्जा से पूर्ण राष्ट्र बताते हुए कहा कि नशीले पदार्थों का इस्तेमाल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि गंभीर सामाजिक चुनौती, सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट और देश के जनसांख्यिकीय लाभ के लिए खतरा है। उनका कहना था कि मादक द्रव्य शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक प्रदर्शन, पारिवारिक सामंजस्य और उत्पादकता पर प्रतिकूल असर डालने के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को भी प्रभावित करते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न तभी साकार हो सकता है जब युवा स्वस्थ और नशे से मुक्त हों और उनका जीवन उद्देश्यपूर्ण हो। नशे से मुक्त युवा कौशल प्राप्त करने, उद्यमिता को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास तथा राष्ट्रीय विकास में सार्थक योगदान देने में अधिक सक्षम होते हैं। इस दौरान उन्होंने नशा मुक्त परिसर अभियान के तहत समर्पित ई-संकल्प मंच और मोबाइल एप्लिकेशन का भी शुभारंभ किया और देश के सभी विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों से इसमें सक्रियता से भाग लेने तथा नशा मुक्त परिसर का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से भी सुनिश्चित करने को कहा कि नशा मुक्त परिसर अभियान सभी केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों का अभिन्न हिस्सा बने।
उन्होंने भारत को युवा ऊर्जा से पूर्ण राष्ट्र बताते हुए कहा नशीले पदार्थों का इस्तेमाल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि गंभीर सामाजिक चुनौती, सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट और देश के जनसांख्यिकीय लाभ के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि मादक द्रव्य शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक प्रदर्शन, पारिवारिक सामंजस्य और उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के व्यापार का आतंकवाद से संबंध होने से यह राष्ट्रीय सुरक्षा को भी प्रभावित करता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न तभी साकार हो सकता है जब युवा स्वस्थ और नशे से मुक्त हों और उनका जीवन उद्देश्यपूर्ण हो। उन्होंने कहा कि नशे से मुक्त युवा कौशल प्राप्त करने, उद्यमिता को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास तथा राष्ट्रीय विकास में सार्थक योगदान देने में अधिक सक्षम होते हैं।
उन्होंने शिक्षा और संस्कृति की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भारत की प्राचीन परंपराओं में आत्म-अनुशासन, मानसिक संतुलन तथा मन और शरीर की पवित्रता को बहुत महत्व दिया गया है। यही भावना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ध्यान और योग को बढ़ावा देने के प्रयासों में भी परिलक्षित होती है।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं की ऊर्जा- अनुसंधान, नवोन्मेष, स्वयंसेवा और राष्ट्र निर्माण में लगाने के लिए 'माई भारत पोर्टल' और 'पीएम अनुसंधान योजना' जैसी पहल का उल्लेख किया और कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020- मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल और छात्र कल्याण पर जोर देती है। उन्होंने कहा कि नशामुक्त परिसर अभियान जैसी पहल सुरक्षित, समावेशी और पठन-पाठन का वातावरण निर्मित करती है।
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