चंडीगढ़ , मार्च 31 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के सीमावर्ती किसानों को भूमि का मालिकाना हक दिलाने की मांग को लेकर मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

इस दौरान भाजपा के राष्ट्रीय सचिव नितिन नबीन भी उपस्थित थे। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल को अपना समर्थन दिया और भरोसा दिलाया कि सीमावर्ती जिलों के रणनीतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इन चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। नितिन नबीन ने जल्द ही पंजाब का दौरा करने का भी वादा किया।

राणा गुरमीत सिंह सोढी के नेतृत्व वाले इस प्रतिनिधिमंडल में अनीश सिडाना (अरोड़ा खत्री समुदाय का प्रतिनिधित्व), हंसा सिंह कॉमरेड (सीमावर्ती क्षेत्र के राय सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व), पूरन चंद (जिन्होंने 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा), बाबा बलविंदर सिंह, देवेंद्र जंग और पुरुषोत्तम कुमार (ओबीसी नेता) शामिल थे।

पंजाब के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए राणा सोढी ने कहा, "पंजाब केवल एक सीमावर्ती राज्य नहीं है-यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की अग्रिम पंक्ति है और देश की खाद्य सुरक्षा का केंद्र है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग केंद्रित और समयबद्ध नीतिगत ध्यान के हकदार हैं।" डिफेंस वायर (बाड़) और जीरो लाइन के पार खेती करने वाले किसानों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा, "हजारों किसान दशकों से इन जमीनों पर खेती कर रहे हैं, फिर भी उन्हें मालिकाना हक से वंचित रखा गया है। यह उन्हें अनिश्चितता की स्थिति में रखता है। मालिकाना हक देना केवल एक नीतिगत निर्णय नहीं है, बल्कि यह सम्मान और न्याय का मामला है।"।

फिरोजपुर-फाजिल्का रोड को फोर-लेन करने और इसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग करते हुए राणा सोढी ने कहा कि यह सड़क नागरिक और रक्षा दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है। हुसैनीवाला व्यापार और यात्रा का एक संपन्न केंद्र था। राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे फिर से खोलने से आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। सीमावर्ती जिलों में हर साल आने वाली बाढ़ से फसलें, घर और पशुधन तबाह हो जाते हैं। मजबूत तटबंध और बुनियादी ढांचे में निवेश की आवश्यकता है।

राणा सोढी ने अंत में दोहराया कि पंजाब केंद्रीय खाद्य भंडार में चावल और गेहूं का एक बड़ा हिस्सा योगदान देता है। इसलिए, सीमावर्ती जिलों का समर्थन करना केवल एक क्षेत्रीय चिंता नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है। ज्ञापन में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि इन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संतुलित विकास सुनिश्चित करने और जीवन स्तर में सुधार के लिए त्वरित कार्रवाई की जाए।

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