पटना , अगस्त 08 -- भी खेल अवसंरचना के अभाव में बड़े आयोजनों की मेजबानी से दूर रहने वाला बिहार आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।राज्य सरकार के पिछले कुछ वर्षों में खेल अवसंरचना पर किए गए बड़े निवेश ने राज्य की सूरत-सीरत बदल दी है। राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बिहार खेल विश्वविद्यालय, पटना के अत्याधुनिक खेल परिसर, जिला खेल परिसरों और पंचायत स्तर तक विकसित हो रहे खेल मैदानों ने बिहार को बड़े खेल आयोजनों के लिए नई पहचान दिलाई है।
राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। करीब 90 एकड़ में विकसित इस विश्वस्तरीय परिसर में अंतरराष्ट्रीय मानकों का हॉकी स्टेडियम, बहुउद्देशीय इंडोर हॉल, ओलंपिक आकार का स्विमिंग पूल, एथलेटिक्स सुविधाएं, खिलाड़ियों के लिए खेल चिकित्सा केंद्र और बिहार खेल विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। हाल ही में यहां 40 हजार दर्शकों की क्षमता वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भी निर्माण किया गया है, जिससे बिहार में क्रिकेट के बड़े आयोजन का रास्ता भी खुल गया है।
राजधानी पटना में भी खेल अवसंरचना को लगातार मजबूत किया गया है। पाटलिपुत्र खेल परिसर (कंकड़बाग) को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया, जहां फुटबॉल, एथलेटिक्स और बहुउद्देशीय इंडोर खेलों की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन हो रहा है। ऊर्जा स्टेडियम, मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास की पहल, प्रशिक्षण केंद्रों का विस्तार तथा राज्यभर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना ने खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का मंच उपलब्ध कराया है। सरकार पटना के पुनपुन क्षेत्र में अत्याधुनिक स्पोर्ट्स सिटी विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है।
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