पटना , अक्टूबर 10 -- ाज्य में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार मोती पालन को बढ़ावा दे रही है। मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत इच्छुक किसानों को मोती पालन का प्रशिक्षण देने के साथ इकाई लागत पर 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इससे राज्य के किसान मछली पालन के साथ मोती उत्पादन कर डबल कमाई कर सकेंगे।

इसी कड़ी में शेखपुरा, छपरा, बांका और सहरसा जिलों के कुल 89 प्रशिक्षणार्थियों को मोती पालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। छह दिवसीय यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 09 अक्टूबर से शुरू है। मीठापुर स्थित मत्स्य विकास भवन के मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रशिक्षणार्थियों को मोती उत्पादन की तकनीक से लेकर उसकी व्यावहारिक प्रक्रिया तक की जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण के दौरान सीप की विभिन्न प्रजातियों, उनमें न्यूक्लियस प्रत्यारोपण तथा सर्जरी की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। प्रशिक्षणार्थियों को तकनीक की व्यावहारिक जानकारी देने के लिए अनुभवी मोती उत्पादकों की भी मदद ली जा रही है। शुक्रवार को बक्सर के मोती उत्पादक किसान श्री धनजी कुशवाहा ने प्रशिक्षणार्थियों को मोती पालन की तकनीक का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया। वे कई वर्षों से मोती पालन कर रहे हैं और विभिन्न जिलों में किसानों को मोती पालन का प्रशिक्षण देते रहे हैं।

वहीं, संयुक्त मत्स्य निदेशक (प्रशिक्षण एवं प्रसार) दिलीप कुमार सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान मोती उत्पादन के लिए उपयोगी सीप की प्रजातियों की जानकारी दी। कार्यक्रम में मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार केंद्र, मीठापुर के व्याख्याता और कनीय व्याख्याता भी उपस्थित थे।

राज्य सरकार की मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 में सभी जिलों में लागू की गई है। इसका उद्देश्य देशी मछलियों की प्रजातियों का संरक्षण एवं संवर्द्धन करने के साथ मत्स्य उत्पादन बढ़ाना और किसानों की वार्षिक आय में वृद्धि करना है। योजना के तहत माइनर कार्प, कैटफिश, वायुश्वासी मछली, झींगा और मोती पालन जैसे विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

योजना के तहत मोती पालन की आधा एकड़ इकाई के लिए 2.246 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है। इस पर 60 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। निर्धारित इकाई लागत के आधार पर लाभार्थी को अधिकतम 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। शेष राशि का वहन लाभार्थी को स्वयं या बैंक ऋण के माध्यम से करना होगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित