पटना , अक्टूबर 16 -- िहार में मछली की बिक्री व्यवस्था को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार सुधा की तर्ज पर फ्रेश कैच फिश कियोस्क स्थापित करने जा रही है, जिसके तहत राज्य में 100 कियोस्क खोले जाएंगे। पहले चरण में 30 और दूसरे चरण में 70 कियोस्क स्थापित करने की योजना है। पहले चरण के 30 कियोस्क का निर्माण किया जा रहा है और जल्द ही इनका शुभारंभ किया जाएगा। इस पहल से शहरी उपभोक्ताओं को स्वच्छ वातावरण में ताजी मछली उपलब्ध कराने के साथ मछली पालकों को बेहतर बाजार भी मिलेगा। उक्त तथ्यों के मद्येनजर राज्य सरकार के द्वारा सात निष्चय-3 में "मत्स्य पालन पर विशेष जोर" का संकल्प लिया गया है जिससे "सबका सम्मान-जीवन आसान" के साथ-साथ "दोगुना रोजगार-दोगुनी आय" की परिकल्पना साकार हो सके।
सात निश्चय-3 के तहत प्रस्तावित इस योजना पर अधिकतम 10.56 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत मत्स्य निदेशालय और बिहार एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एवं डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से इसका क्रियान्वयन किया जाएगा। कियोस्क की स्थापना के लिए सरकारी भूमि, नगर निकायों की भूमि अथवा जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई भूमि का उपयोग किया जाएगा।
पहले चरण में पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा, बेगूसराय, मोतिहारी, बेतिया, हाजीपुर, किशनगंज, कटिहार और मुंगेर सहित प्रमुख शहरों में कियोस्क स्थापित किए जा रहे हैं।
फ्रेश कैच कियोस्क में मछलियों के सुरक्षित भंडारण और बिक्री के लिए कोल्ड चेन, डीप फ्रीजर, डिस्प्ले काउंटर, स्वच्छ जल, जल निकासी, बिजली और बैकअप जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही उपभोक्ताओं को ताजी मछली भी उपलब्ध कराने के लिये व्यवस्था किया जाएगा, इसके लिए स्थानीय मत्स्य उत्पादक एवं फ्रेश कैच कियोस्क संचालक का मजबूत श्रृंखला भी विकसित किया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल भुगतान और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था भी होगी। इससे मछलियों की ताजगी और गुणवत्ता बनाए रखने के साथ बिक्री केंद्रों पर स्वच्छता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
वर्तमान में कई शहरी क्षेत्रों में मछली की बिक्री पारंपरिक और असंगठित तरीके से होती है। इससे मछलियों के भंडारण, स्वच्छता और गुणवत्ता बनाए रखने में चुनौतियां आती हैं। कियोस्क स्थापित होने से इन समस्याओं को दूर करने और मत्स्य उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
योजना के तहत एक कियोस्क की निर्धारित इकाई लागत 11 लाख रुपये है। संभावित मूल्य वृद्धि को शामिल करते हुए इसकी अधिकतम लागत 13.20 लाख रुपये आंकी गई है। सरकार निर्धारित इकाई लागत के 80 प्रतिशत अथवा वास्तविक निर्माण लागत, दोनों में से जो राशि कम होगी, उसका वहन करेगी। कियोस्क के निर्माण के लिए एजेंसी या संवेदक का चयन निविदा प्रक्रिया से किया जाएगा। वहीं, संचालन के लिए भी निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार संचालकों का चयन होगा। केंद्रों के रखरखाव और नियमित संचालन की जिम्मेदारी संबंधित संचालक की होगी।
योजना के तहत कियोस्क संचालकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मत्स्य निदेशालय या बिहार एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एवं डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से मछलियों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्थित आपूर्ति श्रृंखला विकसित की जाएगी। इससे मछली पालकों, मछली किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) और मत्स्य सहकारी समितियों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने का बेहतर अवसर मिलेगा।
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