ओंकारेश्वर (मध्यप्रदेश) , जून 19 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सभी राज्यों से सिकल सेल संबंधी आनुवंशिक बीमारी के उन्मूलन के लिए मिशन मोड में काम करने का आह्वान करते हुए कहा है कि राज्यों की समेकित शक्ति और सक्रियता से देश 2047 से पहले ही सिकल सेल रोग के उन्मूलन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल कर सकता है।

श्रीमती मुर्मु ने शुक्रवार को मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत सात करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले पूरा कर लिया गया है, जो आनुवंशिक रोगों की जांच-परख की दुनिया की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है, जहां अब तक सवा करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है तथा अधिकांश लोगों को जेनेटिक काउंसिलिंग भी प्रदान की गई है।

उन्होंने कहा कि सिकल सेल रोग की चुनौती को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है और लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के शहडोल से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन का शुभारंभ किया था। यह केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि जनजातीय स्वास्थ्य, आनुवंशिक जागरूकता, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक व्यवहार में बदलाव से जुड़ा व्यापक अभियान है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), ट्राइबल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट्स, एम्स, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा विभिन्न राज्य सरकारों के अध्ययनों से पता चला कि सिकल सेल रोग का सबसे अधिक प्रभाव मध्य भारत की जनजातीय पट्टी में है और अनेक परिवार पीढ़ियों से इस बीमारी से प्रभावित रहे हैं, लेकिन उन्हें बीमारी के बारे में जानकारी तक नहीं थी। इसी कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण, आनुवंशिक विज्ञान और डिजिटल निगरानी को एक साथ जोड़कर 17 राज्यों में यह अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से इस बीमारी के उन्मूलन के लिए सक्रिय प्रयास करने का आग्रह करते हुए कहा कि सिकल सेल रोग का उपचार संभव है और सामूहिक प्रयासों से देश से इस बीमारी को समाप्त किया जा सकता है।

श्रीमती मुर्मु ने कहा कि इस मिशन के तीन प्रमुख आयाम हैं, जिनमें बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाना और विवाह पूर्व जेनेटिक काउंसिलिंग, व्यापक स्क्रीनिंग के माध्यम से समय रहते रोग की पहचान तथा समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन के जरिए रोगियों की निरंतर देखभाल सुनिश्चित करना शामिल है। उनका कहना था कि मिशन मोड में की गई स्क्रीनिंग के परिणामस्वरूप अब तक लगभग ढाई लाख लोगों में सिकल सेल संबंधी रोग की पहचान की जा चुकी है तथा 20 लाख से अधिक वाहकों (कैरियर) का भी पता लगाया जा चुका है। वाहकों की इतनी बड़ी संख्या से जुड़ी चुनौतियों को समझने की आवश्यकता है, क्योंकि उनमें रोग के लक्षण नहीं दिखाई देते और उन्हें इसके भविष्यगत प्रभावों का अनुमान नहीं होता।

राष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा रोगियों तथा वाहकों की पहचान और उनकी समुचित स्वास्थ्य देखभाल के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रभावित लोगों, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए पॉइंट ऑफ केयर टेस्ट आधारित जांच सुविधा का विस्तार आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक किया गया है। गत वर्ष "स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान" के तहत राज्य में चार लाख से अधिक महिलाओं की सिकल सेल स्क्रीनिंग कर एक कीर्तिमान स्थापित किया गया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर विद्यार्थियों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा रही है तथा दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से लगातार जांच की जा रही है। उन्होंने पिछले वर्ष शुरू की गई "सिकल मित्र" पहल की भी सराहना की, जिसके तहत जागरूकता बढ़ाने और रोगियों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा एनसीसी कैडेटों को प्रशिक्षित किया गया है।

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