पटना , अक्टूबर 29 -- िहार में मत्स्य पालन के क्षेत्र को संगठित और सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मत्स्य पालकों को जोड़ रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के तहत नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) के जरिए मछुआरों, मत्स्य पालकों और मत्स्य पालन से जुड़े श्रमिकों का पंजीकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र को व्यवस्थित करना, मत्स्य पालकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना और मछली पालन को एक लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित करना है।

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मत्स्य निदेशालय की इस पहल के तहत अब तक बिहार में 1.60 लाख से अधिक मत्स्य पालकों का पंजीकरण हो चुका है। 15 अक्टूबर 2026 की एनएफडीपी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल 1,88,510 आवेदन दर्ज किए गए हैं। इनमें 1,59,735 आवेदन कन्फर्म हो चुके हैं, जबकि 16,281 आवेदन प्रक्रिया में हैं। रिपोर्ट में व्यक्तिगत श्रेणी के 1,87,388 और संगठन श्रेणी के 1,122 आवेदन दर्ज हैं।

एनएफडीपी पोर्टल पर पंजीकरण कराने से मछुआरों और मत्स्य पालकों को डिजिटल पहचान प्राप्त करने में मदद मिल रही है। इसके माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय जानकारी और व्यवसाय की योजना बनाने से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के विभिन्न घटकों का लाभ लेने के लिए एनएफडीपी पर पंजीकरण अनिवार्य है।

योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), छोटे उद्यमों, सहकारी समितियों और मत्स्य किसान संगठनों को 35 प्रतिशत तक प्रदर्शन अनुदान देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य मत्स्य पालन से जुड़े समूहों और संगठनों को प्रोत्साहित करना, उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना तथा इस क्षेत्र में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना है।

राज्य सरकार की इस पहल से मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को एक डिजिटल व्यवस्था के तहत लाने, सरकारी सहायता तक उनकी पहुंच आसान बनाने और इस क्षेत्र में रोजगार एवं आय के अवसर बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

योजना से जुड़ने के इच्छुक मत्स्य पालक, मछुआरे और संबंधित संगठन एनएफडीपी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी संबंधित जिले के जिला मत्स्य कार्यालय से भी प्राप्त की जा सकती है।

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