नयी दिल्ली , जून 16 -- तृणमूल कांग्रेस ने मंगलवार को पार्टी से अलग हुए एक गुट पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि राज्य की जनता आज भी सुश्री ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ी है।

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा सदस्य सौगत रॉय ने मंगलवार को जारी एक बयान में पार्टी के वर्तमान स्वरूप और अलग हुए गुट के बीच बड़ा अंतर बताया। उन्होंने इसे 'तृणमूल टीम' बनाम 'गद्दार टीम' की लड़ाई करार देते हुए दावा किया कि अलग हुए इस गुट के पास न तो कोई जन-समर्थन है और न ही इसकी कोई राजनीतिक प्रासंगिकता बची है।

श्री रॉय ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की पहचान आज भी उसके लोकप्रिय चुनाव चिह्न 'जोड़ा फूल' से है और इसका नेतृत्व सुश्री बनर्जी कर रही हैं, जबकि विरोधी गुट ने एक अलग नाम और चुनाव चिह्न अपना लिया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि तृणमूल विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन का एक प्रमुख घटक बनी हुई है, जबकि प्रतिद्वंद्वी गुट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ जुड़ा हुआ है।

वरिष्ठ सांसद ने हालिया विधानसभा चुनावों में तृणमूल के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करने, लूटपाट और जबरदस्ती करने के बावजूद, तृणमूल को बंगाल में 41 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।

यह तीखी बयानबाजी तृणमूल और उन पूर्व नेताओं के बीच चल रहे राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है, जिन्होंने पार्टी से अलग होकर अपनी नयी राजनीतिक पहल शुरू की है। तृणमूल लगातार ऐसे नेताओं पर पार्टी की विचारधारा और जनादेश के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाती रही है। पार्टी का मानना है कि सुश्री बनर्जी आज भी पश्चिम बंगाल में निर्विवाद राजनीतिक शक्ति बनी हुई हैं।

यह ताजा घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में बढ़ते राजनीतिक मुकाबले को दर्शाता है। तृणमूल खुद को भाजपा और राजग के खिलाफ सबसे प्रमुख विपक्षी ताकत के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है, साथ ही वह अपने मतदाताओं के बीच अपनी पैठ को और मजबूत करने के प्रयासों में जुटी है।

श्री रॉय की यह टिप्पणी उन हमलों का हिस्सा है, जिनमें तृणमूल कांग्रेस के नेता पार्टी छोड़ने वाले अपने पूर्व सहयोगियों पर निशाना साध रहे हैं। ये सहयोगी हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद अलग हो गये थे।

दूसरी ओर, विधानसभा चुनावों में जीत हासिल कर तृणमूल कांग्रेस के लंबे शासन को खत्म करने वाली और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार बनाने वाली भाजपा ने केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सत्तारूढ़ दल ने इसके उलट तृणमूल पर आरोप लगाया है कि वह अपने शासनकाल के दौरान के मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस राज्य के बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाती है, जहां अब भाजपा सत्ता की कुर्सी पर काबिज है और तृणमूल कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी नयी पहचान बनाने में जुटी है।

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