पौड़ी/ , नवंबर 09 -- उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती पर जिला मुख्यालय पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया।

जिला मुख्यालय पौड़ी में आयोजित मुख्य समारोह की शुरुआत स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी, जिलाधिकारी (डीएम) स्वाति एस. भदौरिया तथा मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत समेत पूर्व सैनिकों तथा जनप्रतिनिधियों द्वारा एजेंसी चौक स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित कर की गयी। सभी ने राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए उनके योगदान और बलिदान को याद किया।

समारोह में विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया। राज्य स्थापना की रजत जयंती पर उपस्थित जनसमूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्चुअल संबोधन को भी सुना और उनके संदेश से प्रेरणा ली।

मुख्य अतिथि स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन हजारों आंदोलनकारियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान की परिणति है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के पीछे साधारण जनता की असाधारण भावना थी। एक ऐसा सपना, जिसमें पहाड़ का हर व्यक्ति शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मान का जीवन चाहता था। विधायक ने कहा कि आज जब राज्य अपनी रजत जयंती मना रहा है, तब हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि विकास की रोशनी प्रत्येक गांव और घर तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ें, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दें और 'विकसित उत्तराखंड - सशक्त उत्तराखंड' के निर्माण में भागीदार बनें।

जिलाधिकारी ने राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि उनका त्याग, संघर्ष और बलिदान ही उत्तराखंड के वर्तमान और भविष्य की नींव है। उन्हीं के साहस और समर्पण से हमें यह गौरवशाली राज्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि जनपद में हमारे बीच अनेक उदाहरण ऐसे हैं, जो आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम कर उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। हाल ही में बेड़ू फल को जीआई टैग मिलना इस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

जिलाधिकारी ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलना न केवल राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाता है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नयी ऊर्जा भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक व सामाजिक प्रगति के साथ साथ भावनात्मक प्रगति भी आवश्यक है। इसलिए, विकास के साथ-साथ हमें अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ा रहना होगा। तभी यह विकास वास्तव में सार्थक कहलाएगा।

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