रायपुर , नवंबर 01 -- छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर नवा रायपुर में रविवार से प्रारंभ हुए तीन दिवसीय राज्योत्सव में प्रदेश की समृद्ध लोककला, पारंपरिक हस्तशिल्प और खान-पान की विविधता देखने को मिलीं । आयोजन स्थल पर जहां राज्य के शिल्पकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया तो वहीं स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों के बनाए पारंपरिक व्यंजनों के साथ राजस्थान के प्रसिद्ध पकवान भी आगंतुकों को अपनी ओर खींचा।

राज्योत्सव परिसर में स्थापित शिल्पग्राम में प्रदेश के विभिन्न अंचलों की पारंपरिक हस्तकलाओं को प्रदर्शित किया गया है। यहां झारा आर्ट से निर्मित मूर्तियां, सजावटी वस्तुएं और लोकजीवन पर आधारित कलाकृतियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। खास तकनीक से तैयार इन कलाकृतियों में छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक शिल्प कौशल की झलक दिखाई दी।

सारंगढ़ जिले के ग्राम कांदुरपाली से पहुंचे युवा शिल्पकार प्रदीप झरेका सारबिला की छिंद पेड़ पर आधारित कलाकृति को दर्शकों की सराहना मिली। इस कलाकृति में जनजातीय समाज के जीवन में छिंद पेड़ के महत्व के साथ उससे रस निकालने की पारंपरिक प्रक्रिया को दर्शाया गया है।

शिल्पकार प्रदीप झरेका ने बताया कि राज्योत्सव जैसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन और विपणन का अवसर मिलता है। आगंतुक कलाकृतियों की खरीदारी करने के साथ उनकी निर्माण तकनीक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी भी प्राप्त की। शिल्पग्राम में बस्तर अंचल की युवा महिला शिल्पकारों की कृतियां भी प्रदर्शित की गई हैं। इनमें वन्यजीवों, प्राकृतिक प्रतीकों और जनजातीय जीवन के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया है।

दूसरी ओर, राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खान-पान को भी प्रमुखता से स्थान मिला है। रायपुर के घड़ी चौक स्थित गढ़ कलेवा से पहुंचे मनीषा महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्टॉल लगाया है। यहां चीला, फरा, चौसेला, साबूदाना बड़ा, भजिया, ठेठरी और खुरमी सहित विभिन्न पारंपरिक पकवान परोसे गए हैं।

समूह की महिलाएं इन व्यंजनों के माध्यम से प्रदेश की खान-पान की विरासत को आगे बढ़ाने के साथ अपनी आजीविका भी मजबूत कर रही हैं। पारंपरिक पाककला को रोजगार का माध्यम बनाकर महिलाएं परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं।

राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के साथ अन्य राज्यों की खान-पान संस्कृति को भी स्थान मिला है। राजस्थान के कोटा से पहुंचे नीरज शर्मा का स्टॉल इसका उदाहरण है। यहां राजस्थान के प्रसिद्ध दाल-बाटी-चूरमा और जोधपुर की प्याज कचौरी का स्वाद लेने के लिए आगंतुक पहुंचे हैं।

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