नयी दिल्ली , मार्च 17 -- राज्यसभा में मंगलवार को विपक्षी सदस्यों ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए विदेश नीति से लेकर आर्थिक प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, ऊर्जा और सामाजिक योजनाओं तक कई मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए गए।
विभिन्न दलों के नेताओं ने देश में बढ़ती असमानता, बेरोजगारी, महंगाई, योजनाओं के क्रियान्वयन में खामियों और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर सरकार को घेरा।
कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने सदन में विनियोग विधेयक पर सोमवार को अधूरी रही चर्चा की शुरूआत करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति कमजोर हो गयी है। पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा," हम दूसरे की लड़ाई में सिर क्यों दे रहे हैं । हम वहां जाकर किसी के साथ क्यों शामिल हो रहे हैं। " रसोई गैस की किल्लत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वाराणसी स्थित अन्नपूर्णा देवी मंदिर की रसोई बंद हो गयी है लेकिन सवाल उठता है कि यह नौबत क्यों आई ।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए दस हजार करोड के बजट के आवंटन को कम बताते हुए पूछा कि इससे क्या होगा। आयुष्मान भारत योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह घोटाले में तब्दील हो चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण से संबंधित बीमारियां बढ रही हैं लेकिन इससे निपटने के लिए धन का आवंटन नहीं बढाया गया है। देश में आर्थिक असमानता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दस प्रतिशत धनपतियों के पास देश की 65 प्रतिशत संपत्ति है। उन्होंने कहा कि फसल बीमा योजना में किसानों को पैसा बहुत कम मिल रहा है। उन्होंने रूपये के डालर की तुलना में 93 रुपये पहुंचने का भी जिक्र किया।
तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने कहा कि विनियोग विधेयक से पता चलता है कि वित्त मंत्री ने जो बजट पेश किया था उसमें उनके अनुमान में आठ प्रतिशत की गलती निकली। उन्होंने एक लाख करोड़ रुपये के आर्थिक स्थिरता कोष पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका क्या औचित्य है और यह 30 हजार करोड़ के आकस्मिक कोष से अलग कैसे है। उन्होंने उर्वरक की कालाबाजारी का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर उज्जवला योजना के लिए सरकार ने कुछ भी अतिरिक्त नहीं मांगा है। उन्होंने कहा कि मनरेगा के लिए 33 हजार करोड़ रुपये की मांग की गई है और इसका उद्देश्य पिछले बकाया का भुगतान करना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव आयोग के लिए 7 करोड़रुपये की अतिरिक्त राशि मांगी है और यह 'आई टी इन्फ्रास्ट्रक्चर' के लिए मांगा गया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव , गृह सचिव और पुलिस अधिकारियों को हटाये जाने का मुद्दा भी उठाया।
द्रमुक की डा. कनिमोझी एनवीएन सोमू ने पूछा कि भारत अमेरिका से महंगा तेल क्यों खरीद रहा है। उन्होंने आर्थिक कुप्रंधन, बेरोजगारी, संवैधानिक संस्थानों की स्वायत्ता और चीन के साथ सीमाओं की सुरक्षा की चुनौती का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों की आय दोगुना करने का वादा पूरा नहीं किया। उन्होंने सरकार पर सदस्य ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के दुरूपयोग का भी आरोप लगाया।
शिवसेना यूबीटी की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने मनरेगा योजना को लेकर भी सवाल उठाये।
बहुजन समाज पार्टी के रामजी ने शिक्षा मंत्रालय के लिए अधिक आवंटन किये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए शिक्षा के क्षेत्र में निवेश बेहद जरूरी है। सरकार ने बजट का केवल 4 प्रतिशत ही आवंटन किया है जबकि नयी शिक्षा नीति ने 6 प्रतिशत की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि छात्रों की बढती संख्या के अनुसार देश में आठ लाख शिक्षकों की कमी है और 19 करोड़ बच्चे स्कूलों से बाहर हैं।
शिव सेना यूबीटी के संजय राउत ने देश में गैस सिलेंडर की कमी का उल्लेख करते हुए कहा कि शिरडी में अब दो की जगह केवल एक लडडू मिल रहा है और प्रसाद की थाली में कमी की गयी है। उन्होंने कहा कि मुंबई में हर रोज बीस लाख वड़ा पाव बिकते थे जबकि अब पांच लाख बिक रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री चुनाव रैली में व्यस्त हैं जबकि उन्हें सभी दलों के साथ बैठक करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि यह दावा किया गया था कि चीन और अमेरिका के बाद भारत तीसरी सुपर पॉवर बनने जा रहा है लेकिन भारत की जनता तो सिलेंडर की लाइनों में खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में 17 किसानों ने कर्ज चुकाने के लिए अपनी किडनी बेची है।
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