नयी दिल्ली , अगस्त 07 -- राज्यसभा में विपक्ष के सदस्यों ने इस सप्ताह लगातार पांचवें दिन शुक्रवार को भी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सदन में आकर विपक्ष के सवालों का जवाब देने की मांग करते हुए जोरदार हंगामा किया जिसके कारण सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी और शून्यकाल की कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण मानसून सत्र के तीन सप्ताह में अब तक एक भी दिन शून्यकाल की कार्यवाही सुचारू ढंग से नहीं चल पायी है।
सभापति सी पी राधाकृष्णन ने विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद जैसे ही कार्यवाही शुरू की विपक्ष के सदस्य अपनी जगहों से उठकर जोर-जोर से बोलने लगे। सभापति ने सदस्यों से शांत रहने और अपनी सीटों पर लौटने की अपील करते हुए लोक महत्व के विषय रखने के लिए सदस्यों का नाम पुकारा।
विपक्षी सदस्यों के शांत नहीं होने पर उन्होंने नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने का मौका देते हुए पूछा कि क्या उनके पास कहने के लिए कोई नयी बात है क्योंकि आप हर रोज पुरानी बात को ही दोहराते हैं।
श्री खरगे ने कहा कि उन्हें कुछ नहीं कहना केवल एक अनुरोध करना है कि प्रधानमंत्री सदन में आयें और जवाब दें। उन्होंने कहा कि आसन की ओर से प्रधानमंत्री को सदन में आकर जवाब देने के लिए कहा गया था लेकिन वह आसन की बात नहीं मानकर सदन का अपमान कर रहे हैं। इस दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू ने कहा कि नेता विपक्ष सदन को भ्रमित कर रहे हैं। आसन की ओर से ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है।उन्होंने कहा कि नेता विपक्ष सदन की कार्यवाही में व्यवधान पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कौन किस बात का जवाब देगा यह विपक्ष तय नहीं कर सकता। जिस मंत्री का विषय होता है वहीं जवाब देता है।
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