हैदराबाद , मई 12 -- तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने मंगलवार को हैदराबाद के चंचलगुडा में 'तेलंगाना जेल संग्रहालय' और एक अनूठी पहल 'जेल अनुभव' (फील द जेल एक्सपीरियंस) का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने संग्रहालय की स्थापना को तेलंगाना के जेल प्रशासन के इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि जेलें, जो कभी मुख्य रूप से सजा के केंद्र के रूप में काम करती थीं, अब धीरे-धीरे सुधार, पुनर्वास और मानवीय गरिमा पर केंद्रित संस्थानों में बदल गई हैं।

यह संग्रहालय पेंटिंग दीर्घाओं, पुरानी जेल बैरकों, बेड़ियों, जंजीरों, फांसी के फंदे और दृश्य-श्रव्य प्रदर्शनों के माध्यम से जेल प्रणालियों के विकास को दर्शाता है। इससे आगंतुकों को ऐतिहासिक जेल जीवन और आधुनिक सुधारों को समझने का मौका मिलेगा।

राज्यपाल ने तेलंगाना की जेल और सुधारात्मक सेवा महानिदेशक डॉ. सौम्या मिश्रा और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस पहल से जनता में जागरूकता, सहानुभूति, अनुशासन और कानून के प्रति सम्मान को बढ़ावा मिलेगा।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि संगारेड्डी में बना पिछला जेल संग्रहालय कुछ साल पहले ढह गया था, जिसके बाद चंचलगुडा में इस आधुनिक और प्रभावशाली संग्रहालय को बनाने का निर्णय लिया गया। संग्रहालय में 1961 से 1968 के बीच नागार्जुन सागर बांध के निर्माण के दौरान कैदियों के योगदान को भी दर्शाया गया है, जहाँ कैदियों ने एक खुली जेल में काम किया था।

इस संग्रहालय का मुख्य आकर्षण 'जेल अनुभव' कार्यक्रम है। इसके तहत नागरिक शुल्क चुकाकर 12 या 24 घंटे जेल में रहने का अनुभव ले सकते हैं। इसमें उन्हें जेल का खाना, वहां का अनुशासन और दैनिक दिनचर्या का पालन करना होगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनता को जेल जीवन, कानून के पालन और सामाजिक जिम्मेदारी के बारे में शिक्षित करना है।

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