भराड़ीसैंण , मार्च 09 -- उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में सोमवार को अभिभाषण के बाद राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, अध्यक्ष विधानसभा ऋतु भूषण, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्य सरकार के कई मंत्रियों, विधायकगण एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विधानसभा परिसर में नवनिर्मित उत्तराखण्ड की संस्कृति और लोककला पर आधारित पेंटिंग गैलरी का अवलोकन किया गया।

इस गैलरी में श्रीमती भूषण के विशेष प्रयासों से उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति को दर्शाती 70 से अधिक पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से रम्माण के पारंपरिक मुखौटे, नंदा राजजात यात्रा, रम्माण पेंटिंग, छोलिया नृत्य, ऐपन कला, पारंपरिक आभूषण तथा लोक वाद्य यंत्रों को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। इन सभी पेंटिंग्स को प्रदेश के ही प्रतिभाशाली कलाकारों मुकुल बड़ूनी, ज्योति जोशी एवं मोहनलाल द्वारा तैयार किया गया है, जिनकी कला के माध्यम से उत्तराखण्ड की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष भूषण से जब इस पहल के विषय में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र या प्रदेश की आत्मा उसकी संस्कृति होती है। यदि किसी राष्ट्र या प्रदेश को जीवित रखना है और उसे निरंतर आगे बढ़ाना है, तो उसकी संस्कृति को बचाने और उसे आगे बढ़ाने के प्रयास निरंतर होते रहने चाहिए। मैंने भी इसी भावना के साथ कार्य किया है। वर्ष 2022 से लगातार उत्तराखण्ड की संस्कृति और लोककला को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हूँ। जब भी मुझे देश के किसी बड़े व्यक्तित्व से मिलने का अवसर मिलता है, तो मैं उन्हें ऐपन कला से निर्मित शॉल, हमारे प्रसिद्ध रम्माण के मुखौटे अथवा हमारे पहाड़ी उत्पाद भेंट करती हूँ। उन्होंने बताया कि अक्सर वे इन उपहारों के बारे में जिज्ञासा से पूछते हैं, तब मुझे उन्हें उत्तराखण्ड की समृद्ध परंपराओं और लोककलाओं के बारे में बताने का अवसर मिलता है। इससे हमारी लोककलाओं का प्रचार-प्रसार होता है और अधिक लोग इनके बारे में जान पाते हैं।

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