सिलीगुड़ी , जून 01 -- पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने कहा है कि देश की सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक नींव ऐसे दबावों का सामना कर रही है जिन पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

उन्होंने यहां एक कार्यक्रम के दौरान उत्तर बंगाल के सामने मौजूद दो गंभीर चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सांस्कृतिक सामंजस्य से संबंधित मुद्दों का उल्लेख किया और कहा कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर के कारण उत्तर बंगाल देश की सुरक्षा संरचना में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान रखता है जो उत्तर भारत को पूर्वी राज्यों से जोड़ता है।

राज्यपाल ने रविवार शाम को सिलीगुड़ी में देवर्षि नारद जयंती के अवसर पर विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक नींव ऐसे दबावों का सामना कर रही है जिन पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने सुरक्षा पहलू के साथ-साथ एक बढ़ती हुई सांस्कृतिक चुनौती का जिक्र किया और धर्मांतरण के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ मामलों में धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर समुदायों में विभाजन पैदा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाज, जिसने ऐतिहासिक रूप से अपनी एकता और साझा विरासत से शक्ति प्राप्त की है, उसे धार्मिक आधार पर विभाजित नहीं किया जाना चाहिए।

राज्यपाल ने सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को उजागर करने में मीडिया की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पूछा कि क्या पत्रकार समाज पर दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाले घटनाक्रमों पर पर्याप्त एवं जिम्मेदारीपूर्ण रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि शासन एवं समाज के बीच कभी-कभी एक अंतर मौजूद होता है लेकिन कहा कि उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सटीक जानकारी और सूचित सार्वजनिक चर्चा आवश्यक है।

पत्रकारिता की नैतिक जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए श्री रवि ने कहा कि इस पेशे को व्यापक राष्ट्रीय हित एवं सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय एकता के विचार पर बल देते हुए कहा कि सभी भारतीय एक ही मातृभूमि की संतान हैं। इस संदर्भ में उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की प्रतिष्ठित रचना वंदे मातरम और भारत की राष्ट्रीय चेतना में इसके महत्व का उल्लेख किया।

राज्यपाल ने अपने प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए, केंद्रीय गृह मंत्रालय में अपने कार्यकाल और पूर्वोत्तर क्षेत्र से संबंधित मुद्दों पर अपनी भागीदारी को याद किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने देखा कि कैसे कई जनजातीय समुदाय खुद को व्यापक राष्ट्रीय मुख्यधारा से अलग समझने लगे जिसके परिणामस्वरूप विभाजन और लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष उत्पन्न हुए। उन्होंने कहा कि भारत के विविध समुदायों ने परंपरागत रूप से एक व्यापक सांस्कृतिक लगाव साझा किया है लेकिन स्वतंत्रता के बाद भी विभाजन उत्पन्न करने और उसे निरंतर रखने के प्रयास विभिन्न रूपों में जारी रहे हैं।

श्री रवि ने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे समाज के समक्ष वास्तविक तथ्य, संतुलित रिपोर्टिंग एवं विश्वसनीय जानकारी प्रस्तुत करें। उन्होंने गलत सूचनाओं या अपुष्ट दावों के आधार पर कहानियां गढ़ने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसी विधियां सूचित सार्वजनिक संवाद को कमजोर करती हैं। भारत की विविधता को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि ऐसे समय में जब देश आर्थिक विकास, सैन्य क्षमता, वैज्ञानिक उन्नति और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है कुछ हलकों में इसे कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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