लखनऊ , अगस्त 11 -- अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश में राज्यपाल के कार्यकाल और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के कुलपति की पुनर्नियुक्ति को लेकर सवाल उठाते हुए दोनों मामलों में नियमों एवं संवैधानिक प्रावधानों के पालन की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

श्री मौर्य ने मंगलवार को सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि राज्यपाल का कार्यकाल सामान्यतः पांच वर्ष का होता है। पांच वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद यदि कोई राज्यपाल सात वर्ष तक पद पर बना रहता है तो उसके पीछे संवैधानिक और प्रशासनिक आधार क्या है। यदि कार्यकाल बढ़ाने अथवा पुनर्नियुक्ति से संबंधित कोई स्पष्ट आदेश या प्रावधान है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्यपाल की नियुक्ति और कार्यकाल से जुड़े प्रावधानों की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

अपनी जनता पार्टी के अध्यक्ष ने केजीएमयू के कुलपति की पुनर्नियुक्ति पर भी सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि कुलपति पर भ्रष्टाचार तथा आरक्षण संबंधी नियमों की अनदेखी के आरोप लगाये गये हैं। ऐसे आरोपों के बावजूद पुनर्नियुक्ति किया जाना पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थानों और उच्च शिक्षण संस्थानों में नियुक्तियां पूरी पारदर्शिता तथा निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। किसी भी नियुक्ति को लेकर यदि शिकायत या आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराया जाना आवश्यक है।

श्री मौर्य ने कहा कि सवाल केवल किसी एक व्यक्ति की नियुक्ति का नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व तथा संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि नियुक्तियों में नियम और संविधान का पालन नहीं होगा तो वंचित एवं पिछड़े वर्गों को बराबरी का प्रतिनिधित्व और न्याय कैसे मिलेगा।

उन्होंने नियुक्तियों से संबंधित नियमों, आदेशों और प्रक्रिया को सार्वजनिक करने तथा आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

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