कोलकाता , जून 23 -- तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में उनके भाषण को बार-बार बाधित करने वाले भाजपा विधायकों को जवाब देने के लिए राजनीतिक हमलों, कटाक्ष एवं व्यक्तिगत तंज का सहारा लिया, जिसके बाद सदन में हंगामा खड़ा हो गया।
हंगामा तब शुरू हुआ जब श्री घोष राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेने के लिए खड़े हुए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने उनकी राजनीतिक पहचान पर सवाल उठाया और ताना कसा कि 'आप किस तृणमूल से हैं'?इस पर तीखा पलटवार करते हुए श्री घोष ने कहा, "मेरी उंगली की स्याही अभी फीकी नहीं पड़ी है। मैं गद्दार नहीं हूं।"बहस तेज होने पर श्री घोष ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक जानबूझकर उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "वे मुझसे डरते हैं। यही वजह है कि वे मुझे बोलने नहीं दे रहे हैं।" उनकी इस टिप्पणी पर विपक्षी बेंचों की ओर से भारी विरोध हुआ।
मामला तब और बढ़ गया जब श्री घोष ने बिना नाम लिए विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी पर हमला बोल दिया। बालुरघाट से जुड़े एक कथित बलात्कार मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने ऐसे व्यक्ति को विपक्ष का नेता बनाये जाने के फैसले पर सवाल उठाये।
अध्यक्ष रथेंद्रनाथ बसु को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "बलात्कार के मामले में आरोपी किसी व्यक्ति को विपक्ष का नेता कैसे बनाया जा सकता है?" इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने बीच-बचाव किया और श्री घोष से ऐसी टिप्पणियां न करने को कहा।
उनकी इन टिप्पणियों के कारण भाजपा विधायकों ने नये सिरे से विरोध प्रदर्शन किया और सदन में अव्यवस्था ज्यादा बढ़ गयी। श्री घोष ने भाजपा विधायकों पर भी निशाना साधते हुए कहा, "आप मुझसे डरते हैं। अगले पांच वर्ष तक इसी तरह मुझसे डरते रहिये और मुझे अहमियत देते रहिये।"जब भाजपा विधायक अशोक डिंडा ने उनकी कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जतायी तो श्री घोष ने फुटबॉल स्टार लियोनेल मेस्सी पर श्री डिंडा की पुरानी टिप्पणियों से जुड़े विवाद का जिक्र कर दिया, जिससे सत्ता पक्ष के कुछ हिस्सों में हंसी गूंज उठी।
सदन में तनाव बढ़ता देख संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष ने संयम बरतने की अपील की। उन्होंने सदस्यों को याद दिलाया कि विधानसभा में यह श्री घोष का पहला भाषण है और दोनों पक्षों से संसदीय मर्यादा बनाये रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, "राजनीतिक मतभेदों पर बहस करने के लिए अगले पांच वर्षों में कई मौके मिलेंगे। आइए हम शालीनता बनाये रखें और राज्यपाल के अभिभाषण पर ध्यान केंद्रित करें।"अपने भाषण के दौरान श्री घोष ने घुसपैठ और कोलकाता के रेड रोड पर नमाज पढ़ने पर लगी पाबंदियों जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने इनमें से कई टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दिया।
इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने एक मीडियाकर्मी से कहा कि लोकतंत्र के लिए एक मजबूत विपक्ष बेहद जरूरी है और उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर सत्ता से बाहर रहने की आदत न डाल पाने का आरोप लगाया।
इसी बीच, माकपा नेता सुजान चक्रवर्ती ने मीडियाकर्मियों से कहा कि बंगाल की राजनीतिक संस्कृति काफी बदल गयी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में विपक्ष को हाशिये पर धकेलने की कोशिशें की जा रही हैं।
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