गोरखपुर , अगस्त 6 -- उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना सुशासन की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने कहा कि शासन और समाज के साझा प्रयासों से ही समावेशी विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर, विश्वविद्यालय, गोरखपुर के 45वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुये उन्होने कहा कि सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचना चाहिए। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा।
उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और युवाओं के सशक्तीकरण पर बल देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और पोषण संबंधी जागरूकता समाज के विकास की मजबूत नींव हैं। उन्होंने अधिकारियों से इन क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि सामाजिक सहभागिता के बिना किसी भी विकास योजना को पूरी सफलता नहीं मिल सकती। उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों से जनहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रशासन का दायित्व केवल योजनाएं लागू करना नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की सतत निगरानी करना भी है। उन्होंने अधिकारियों से जनसमस्याओं के त्वरित और संवेदनशील निस्तारण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी से राज्य को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। इसके लिए सरकार और जनता के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित विभाग और सामाजिक संस्थाएं समन्वित प्रयासों के माध्यम से प्रदेश के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे तथा जनकल्याण की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे।
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