पटना , दिसम्बर 02 -- पूर्व केंद्रीय मंत्री और पद्मभूषण डॉ..सी. पी.ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि देशरत्न राजेंद्रप्रसाद के जीवन से सभी लोगों को निरंतर गतिशील रहने की प्रेरणा मिलती है।
श्री ठाकुरने देशरत्न डॉ. राजेद्र प्रसाद की जयंती की पूर्व संध्या पर हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित समारोह मेंकहा कि राजेंद्र बाबू के जीवन से हमें निरन्तर गतिशील रहने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि राजेंद्र बाबू को सच्चीश्रद्धांजलि खुद और समाज को उन्नत तथा बेहतर बनाने के प्रयास से दी जा सकती है।
इससे पहले समारोह का उद्घाटन करते हुए, सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि राजेन्द्र बाबू अद्भुत मेधा के महापुरुष थे। सिक्किम में भी उनके प्रति लोगों की असीम श्रद्धा देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि गांधी जी की प्रेरणा से राजेंद्र बाबू ने देश-सेवा में अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित कर दिया। राष्ट्रपति रहते हुए भी वे जमीनी स्तर पर समाज से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि उनका जीवन अनुकरणीय है और उनकी जीवनी पाठ्यपुस्तकों में आनी चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ.अनिल सुलभ ने कहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्नडॉ.राजेंद्र प्रसाद बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के संस्थापकों में एक थे और साथ में वह एक प्रमुख 'हिन्दी-प्रचारक' भी थे। दक्षिण-भारत के अनेक प्रांतों में उन्होंने हिन्दी का प्रचार किया। राष्ट्र और राष्ट्र-भाषा के लिए दिया गया उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि हिन्दी की सेवा उनके लिए 'राष्ट्र-सेवा' थी। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के समय महात्मा गांधी के बाद देशरत्न सबसे प्रभावशाली नेताओं में एक थे।
श्री सुलभ ने कहा कि 20वीं सदी में डॉ.राजेन्द्र प्रसाद जैसी मेधा का दूसरा कोई व्यक्ति पैदा देश में नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उनकी जयंती को 'राष्ट्रीय मेधा-दिवस' के रूप में मनाने का आग्रह उनकी संस्था वर्षो से करती आ रही है।
समारोह में सम्मेलन की उपाध्यक्ष डॉ.मधु वर्मा, रत्नेश्वर सिंह, डॉ.समरेंद्र नारायण आर्य, उर्मिला नारायण, डॉ.मुकेश कुमार ओझा, नीलाभ मिश्र तथा जय किशन ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर कवि-सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें आरपी घायल, आचार्य विजय गुंजन, प्रो. सुनील कुमार उपाध्याय, सिद्धेश्वर, कुमार अनुपम, ईं अशोक कुमार, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, डॉ.सुषमा कुमारी, रौली राजवी, इन्दु भूषण सहाय, राज आनन्द आदि कवियों और कवयित्रियों ने काव्यपाठ किया। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन श्रद्धा कुमारी ने किया।
शैलेश प्रेमवार्तापटना, 02 दिसम्बर (वार्ता) पूर्व केंद्रीय मंत्री और पद्मभूषण डॉ..सी. पी.ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि देशरत्न राजेंद्रप्रसाद के जीवन से सभी लोगों को निरंतर गतिशील रहने की प्रेरणा मिलती है।
श्री ठाकुरने देशरत्न डॉ. राजेद्र प्रसाद की जयंती की पूर्व संध्या पर हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित समारोह मेंकहा कि राजेंद्र बाबू के जीवन से हमें निरन्तर गतिशील रहने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि राजेंद्र बाबू को सच्चीश्रद्धांजलि खुद और समाज को उन्नत तथा बेहतर बनाने के प्रयास से दी जा सकती है।
इससे पहले समारोह का उद्घाटन करते हुए, सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि राजेन्द्र बाबू अद्भुत मेधा के महापुरुष थे। सिक्किम में भी उनके प्रति लोगों की असीम श्रद्धा देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि गांधी जी की प्रेरणा से राजेंद्र बाबू ने देश-सेवा में अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित कर दिया। राष्ट्रपति रहते हुए भी वे जमीनी स्तर पर समाज से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि उनका जीवन अनुकरणीय है और उनकी जीवनी पाठ्यपुस्तकों में आनी चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ.अनिल सुलभ ने कहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्नडॉ.राजेंद्र प्रसाद बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के संस्थापकों में एक थे और साथ में वह एक प्रमुख 'हिन्दी-प्रचारक' भी थे। दक्षिण-भारत के अनेक प्रांतों में उन्होंने हिन्दी का प्रचार किया। राष्ट्र और राष्ट्र-भाषा के लिए दिया गया उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि हिन्दी की सेवा उनके लिए 'राष्ट्र-सेवा' थी। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के समय महात्मा गांधी के बाद देशरत्न सबसे प्रभावशाली नेताओं में एक थे।
श्री सुलभ ने कहा कि 20वीं सदी में डॉ.राजेन्द्र प्रसाद जैसी मेधा का दूसरा कोई व्यक्ति पैदा देश में नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उनकी जयंती को 'राष्ट्रीय मेधा-दिवस' के रूप में मनाने का आग्रह उनकी संस्था वर्षो से करती आ रही है।
समारोह में सम्मेलन की उपाध्यक्ष डॉ.मधु वर्मा, रत्नेश्वर सिंह, डॉ.समरेंद्र नारायण आर्य, उर्मिला नारायण, डॉ.मुकेश कुमार ओझा, नीलाभ मिश्र तथा जय किशन ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर कवि-सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें आरपी घायल, आचार्य विजय गुंजन, प्रो. सुनील कुमार उपाध्याय, सिद्धेश्वर, कुमार अनुपम, ईं अशोक कुमार, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, डॉ.सुषमा कुमारी, रौली राजवी, इन्दु भूषण सहाय, राज आनन्द आदि कवियों और कवयित्रियों ने काव्यपाठ किया। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन श्रद्धा कुमारी ने किया।
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