पटना , अप्रैल 30 -- बिहार में नौ मार्च से जारी राजस्व सेवा संघ के अधिकारियों का सामूहिक अवकाश गुरुवार को समाप्त हो गया है।

राज्य सरकार की ओर से अधिकारियों की आवश्यक मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिए जाने के बाद यह गतिरोध खत्म हुआ है। इससे करीब दो महीने से प्रभावित राजस्व कार्यों के सामान्य संचालन का रास्ता साफ हो गया है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने बताया कि सामूहिक अवकाश के कारण दाखिल-खारिज, परिमार्जन, मापी, भूमि विवाद निपटारा सहित कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए थे। अब इन सभी कार्यों में तेजी लाने के लिए विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभाग की पहली प्राथमिकता आम जनता से जुड़े लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन है। इसके लिए सभी जिलों के समाहर्ताओं एवं अंचल अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लंबित आवेदनों की समीक्षा करें और समयबद्ध तरीके से उनका निष्पादन सुनिश्चित करें।

सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि चार मई से सभी राजस्व सेवा के अधिकारी अपने-अपने पदस्थापन स्थल पर योगदान देना सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि अनुपस्थित रहने या कार्य में लापरवाही बरतने पर आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

विभाग ने जिला स्तर पर विशेष मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी शुरू करने का निर्णय लिया है, जिससे कार्यों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके। इसके तहत लंबित मामलों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन की कार्ययोजना बनाई जाएगी।

अधिकारियों के सामूहिक अवकाश समाप्त होने से भूमि संबंधी सेवाओं में आई सुस्ती अब दूर होगी। खासकर दाखिल-खारिज, प्रमाण पत्र निर्गमन और भूमि विवादों के निपटारे में तेजी आएगी।सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि राजस्व अधिकारियों की मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए व्यावहारिक समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, जिससे भविष्य में इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो और प्रशासनिक कार्य बाधित न हों।

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