जयपुर , फरवरी 21 -- राजस्थान विधानसभा में शनिवार को राजस्व विभाग की 23 अरब 34 करोड़ 61 लाख 01 हजार रूपए की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दी गई।

इससे पहले राजस्व मंत्री हेमन्त मीणा ने राजस्व विभाग की अनुदान मांग पर हुई बहस का जवाब देते हुए कहा कि राजस्व विभाग आमजन एवं किसानों से जुड़ा हुआ विभाग है। समय के साथ विभाग भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण, ऑनलाइन नामांतरण एवं तकनीकी उपयोग से सीमांकन के साथ आधुनिकीकरण की ओर बढ़ रहा है। इससे विभाग के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता आई है। इससे किसानों के हितों का संरक्षण, भू-अधिकारों की सुरक्षा एवं न्याय पूर्ण राजस्व प्रणाली निर्मित हुई है।

उन्होंने बताया कि नामांतरण के मामलों में किसानों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता था। प्रदेश सरकार द्वारा भू नामांतरण आवेदन दर्ज एवं स्वीकृत करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से पेपरलेस कर दिया गया है। तहसीलदार के स्तर पर आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया में फिको सिस्टम (फर्स्ट इन फर्स्ट आउट) लागू किया गया है। इससे भू नामांतरण प्रकिया आसान हुई है और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगने से किसानों को राहत मिली है।

उन्होंने बताया कि लघु उद्योग को प्रोत्साहन देने एवं ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ाने के लिए कृषि भूमि के गैर कृषि प्रयोजन के लिए कन्वर्जन हेतु निर्धारित समयावधि को 90 दिन से घटकर 45 दिन किया गया है। साथ ही पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन संपन्न करने का प्रावधान किया गया है। विभाग द्वारा गत दो वर्षों में 43 हजार 350 प्रकरणों में 24 हजार 886 हैक्टेयर भूमि का कन्वर्जन किया गया । श्री मीणा ने बताया कि फर्जी तरीके से सरकारी भूमियों को खुर्द-बुर्द करने के प्रकरणों की रोकथाम हेतु प्रदेश सरकार द्वारा राजकीय भूमियों के संरक्षण के लिए राजकीय भूमि नामान्तरण परामर्श समिति का गठन किया गया है।

राजस्व मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार वंचित वर्गों के उत्थान हेतु प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों की खातेदारी भूमि पर सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजना के लिए कन्वर्जन निःशुल्क किए जाने एवं रेकॉर्डेड रास्ते होने की अनिवार्यता समाप्ति किये जाने के प्रावधान किये गये है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न आदिवासी बाहुल्य जिलों के राजस्थान ग्रामदानी अधिनियम से शासित गांवों के किसानों के नाम राजस्व रेकॉर्ड में अंकित नहीं होते हैं। इससे उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण आदि का लाभ नहीं मिल पाता है। प्रदेश सरकार द्वारा बजट में इस अधिनियम में संशोधन कर इन गांवों के किसानों को खातेदारी अधिकार के लाभ प्रदान करने की घोषणा की गई है। साथ ही तहसीलदार को उक्त प्रयोजन के लिए कन्वर्जन आदेश जारी करने हेतु अधिकृत किया गया है।

श्री मीणा बताया कि आवास से वंचित डीएनटी समुदाय के लोगों को भू-खण्ड आवंटित करने के लिए पट्टा वितरण अभियान के दौरान राज्य सरकार की शक्तियां समस्त जिला कलेक्टर को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में प्रत्यायोजित की गयी हैं। इसकी अवधि को आगामी 19 मई तक बढा दिया गया है।

उन्होंने बताया कि राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा गत पांच फरवरी को की गई घोषणा की अनुपालना में जल्द ही कानून लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण एवं आस्था स्थलों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में 2842 हेक्टेयर राजकीय सिवायचक भूमि को 'ओरण' प्रयोजनार्थ आरक्षित किया गया है।

श्री मीणा ने कहा कि आमजन को सुलभ प्रशासन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्व इकाईयों के पुनर्गठन के लिए डॉ. ललित के. पंवार की अध्यक्षता में राज्य प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन सलाहकार समिति का गठन किया गया है। यह समिति नवीन राजस्व ईकाइयों के संबंध में मार्गदर्शी सिद्धान्त तथा कार्यों के अनुपात में पदों की आवश्यकता को देखते हुए प्रशासनिक ईकाइयों एवं राजस्व न्यायालयों की पदीय संरचना के संबंध में अनुशंसा करेगी।

उन्होंने कहा कि किसानों को खेत तक पहुंच मार्ग उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा ''रास्ता खोलो अभियान'' चलाकर कुल 9404 रास्ते खुलवाये गये हैं। साथ ही खातेदार को अपनी जोत तक पहुंचने हेतु चारागाह में से रास्ता दिये जाने के लिए भी प्रावधान किये गये हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को भूमि संबंधी विवादों के लिए दूरदराज स्थित न्यायालयों में ना जाना पड़े इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा भू-प्रबंध अधिकारी एवं राजस्व अपील प्राधिकारियों के कैम्प कोर्ट वल्लभनगर, केकड़ी एवं शाहपुरा (भीलवाड़ा) में लगाने का निर्णय लिया गया है।

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