लालकुआं , सितंबर 27 -- उत्तराखंड के लालकुआं स्थित बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर हजारों ग्रामीणों का आक्रोश एक बार फिर सड़क पर उतर आया। बड़ी संख्या में ग्रामीण रैली के रूप में तहसील पहुंचे और धरना-प्रदर्शन कर शासन-प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की।

ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब जिला स्तरीय वन अधिकार समिति दावों को मंजूरी दे चुकी है तो राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने में अब देरी क्यों की जा रही है।

वनाधिकार संगठन के उमेश चन्द्र भट्ट के अनुसार बिंदुखत्ता के 32 गांवों से जुड़े 11,703 दावेदारों की ओर से वनाधिकार अधिनियम की धारा 3(1)(ज) के तहत सामुदायिक दावे प्रस्तुत किए गए थे। 19 जून 2024 को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने इन दावों को सर्वसम्मति से पारित कर दिया था। इसके बाद राजस्व ग्राम की अधिसूचना और बंदोबस्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया लेकिन अभी तक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की मांग वर्षों से चली आ रही है। इस संबंध में अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक लगातार ज्ञापन दिए गए, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। मांग को लेकर 15 अगस्त से पदयात्रा के जरिए जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

तहसील पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शन में राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने के साथ ही गौला नदी के किनारे स्थायी तटबंध निर्माण की मांग भी रखी गई। ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध बनने से नदी के कटाव और उससे होने वाले नुकसान की समस्या से राहत मिल सकती है।

रैली में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के उमड़ने के चलते प्रशासन पहले से अलर्ट था। लालकुआं बाजार से तहसील क्षेत्र तक भारी पुलिस बल की तैनाती रही। इस दौरान हजारों ग्रामीण तहसील परिसर में जुटे। ग्रामीणों की ओर से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया और जल्दी राजस्व ग्राम संबंधी अधिसूचना जारी करने की मांग की गयी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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