मुंबई , जुलाई 25 -- राजस्व गुप्तचर निदेशालय (डीआरआई) ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (सीएसएमआईए) से संचालित होने वाले दो संगठित सोना तस्करी गिरोह का पर्दाफाश कर 23.63 करोड़ रुपये मूल्य का 15.76 किलो विदेशी सोना जब्त करने के साथ ही आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।
डीआरआई के सूत्रों के मुताबिक सोना जब्त करने की यह कार्रवाई 22 जुलाई से 24 जुलाई के बीच चलाए गये खुफिया जानकारी पर आधारित दो अभियानों - 'ऑपरेशन स्काई वॉल्ट' और 'ऑपरेशन मिडास मॉप' के दौरान की गयी।
उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन स्काई वॉल्ट' में इथियोपिया के अदीस अबाबा से मुंबई पहुंचे तीन विदेशी नागरिकों को रोका। सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर अधिकारियों ने विमान की गहन तलाशी ली और लगभग 18 करोड़ रुपये मूल्य के 12.004 किलोग्राम 24-कैरेट विदेशी मूल के सोने के बिस्कुट बरामद किये। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आरोपियों ने कथित तौर पर सोने के बिस्कुटों को हवाई अड्डे से ले जाने के बजाय विमान के भीतर ही छिपा दिया था। यह तस्करी का सामान बाद में तस्करी गिरोह के सदस्यों द्वारा निकाला जाना था, ताकि सीमा शुल्क जांच से बचा जा सके और इसे हवाई अड्डे से बाहर भेजा जा सके।
एक अन्य खुफिया जानकारी आधारित अभियान 'ऑपरेशन मिडास मॉप' में हवाई अड्डे के कर्मचारियों से जुड़े एक अन्य कथित सोना-तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया। इस अभियान के दौरान अधिकारियों ने विमान की सफाई करने वाले दो कर्मचारियों, एक यात्री और तस्करी गिरोह के दो अन्य कथित सदस्यों को रोका। उनके पास से मोम के रूप में 24-कैरेट विदेशी मूल की 3.76 किलोग्राम सोने की धूल बरामद की गयी, जिसकी कीमत लगभग 5.63 करोड़ रुपये है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, यात्री ने दुबई से मुंबई पहुंचे एक विमान के भीतर कथित तौर पर सोने की धूल छिपा दी थी। यात्रियों के उतरने के बाद सफाई कर्मचारियों द्वारा इस तस्करी के सामान को गुप्त रूप से निकाला जाना था और फिर बाहर इंतजार कर रहे तस्करी गिरोह के सदस्यों को सौंपने के लिए हवाई अड्डे से बाहर ले जाया जाना था।
डीआरआई ने कहा कि सभी आठों आरोपियों को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। तस्करी गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और बड़े सोना-तस्करी तंत्र का पर्दाफाश करने के लिए आगे की जांच जारी है।
निदेशालय ने कहा कि ये दोनों अभियान संगठित सोना तस्करी गिरोह को खत्म करने और भारतीय हवाई अड्डों के जरिये कीमती धातुओं की अवैध आवाजाही को रोकने के लिए उसके निरंतर खुफिया-आधारित प्रयासों को रेखांकित करते हैं।
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