जयपुर , फरवरी 10 -- राजस्थान के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश की वन्यजीव संपदा के संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में सतत और प्रभावी कदम उठा रही है।

श्री शर्मा ने मंगलवार को शासन सचिवालय में राज्य वन्यजीव मंडल की स्थायी समिति की सप्तम बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की समुचित निगरानी के लिए एक विशेष सेल का गठन किया जाए, जो नियमित रूप से विभाग को रिपोर्ट उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महीने नवाचार और विकास कार्यों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाए ताकि राज्य सरकार के सकारात्मक प्रयासों से लोग अवगत हो सकें। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में स्थित ऐतिहासिक महत्व की इमारतों, स्मारकों एवं शिकार हॉल का विभाग द्वारा समुचित संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही इन स्थलों का चिह्नांकन कर उन्हें पर्यटन की दृष्टि से व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए, ताकि उनकी विरासत संरक्षित रहते हुए पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके।

उन्होंने वाइल्डलाइफ इंटेलिजेंस नेटवर्क को सशक्त बनाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे वन्यजीव संबंधी मामलों में वन विभाग की पुलिस पर निर्भरता कम होगी। वन्यजीवों के जनसंख्या प्रबंधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की रोकथाम के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। किसी वन्यजीव की मृत्यु की स्थिति में विभाग द्वारा प्रेस वार्ता कर तथ्यात्मक जानकारी साझा की जाए, ताकि भ्रामक और अपुष्ट खबरों से आमजन को दूर रखा जा सके।

उन्होंने फॉरेस्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम संचालित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे वन क्षेत्रों में निवासरत समुदायों को आजीविका के अवसर मिलेंगे और क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। बैठक में कराकल संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई तथा वन्यजीव संरक्षण की दिशा में भावी कार्ययोजना पर सुझाव आमंत्रित किए गए।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार ने कहा कि वन्यजीव की मृत्यु के बाद विभागीय स्तर पर स्पष्ट प्रोटोकॉल निर्धारित किया जाए। साथ ही वन क्षेत्रों से सटे गांवों में प्रत्येक महीना बैठक आयोजित कर स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित किया जाए, उनकी समस्याएं सुनी जाएं और आवश्यक समाधान सुनिश्चित किया जाए।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित