चंडीगढ़ , मार्च 18 -- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बुधवार को स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार दशकों से बकाया पानी के उपयोग के लिए राजस्थान सरकार से 1.44 लाख करोड़ रूपये की मांग का दावा करेगी।
उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा है कि राजस्थान को या तो पंजाब का वाजिब हक देना होगा या पानी लेना बंद करना होगा।उन्होंने इस व्यवस्था को नियंत्रित करने वाले ऐतिहासिक 1920 के समझौते की समीक्षा की भी मांग की।
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि फिरोजपुर फीडर के माध्यम से 1960 से लिए जा रहे पानी के लिए राजस्थान सरकार पर पंजाब का 1.44 लाख करोड़ रूपये बकाया है, जिसके लिए आज तक एक पैसा भी नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि 1920 के दशक में बीकानेर रियासत, तत्कालीन पंजाब और अंग्रेजों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें राजस्थान प्रति एकड़ के आधार पर पानी का भुगतान करने के लिए सहमत हुआ था।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1960 तक भुगतान किया गया था, लेकिन 'सिंधु जल संधि' के बाद राजस्थान ने 18,000 क्यूसेक पानी लेना तो जारी रखा, पर भुगतान बंद कर दिया। उन्होंने राजस्थान के रुख में विरोधाभास उजागर करते हुए कहा, "आज भी राजस्थान 1920 के समझौते के तहत पानी ले रहा है, लेकिन जब भुगतान की बारी आती है, तो वह 1960 की व्यवस्था का सहारा लेकर बचने की कोशिश करता है।" समझौते में स्पष्ट रूप से हर 25 साल में समीक्षा का आदेश दिया गया था, लेकिन पिछली सरकारों ने पंजाब के इस अधिकार के लिए कभी आवाज नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि 1960 में नई व्यवस्था करते समय तत्कालीन सरकारों ने भुगतान का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने 1920 के मूल समझौते को रद्द भी नहीं किया था।
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