जयपुर , फरवरी 11 -- राजस्थान की उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी ने बुधवार को विधानसभा में छह लाख 10 हजार 956 करोड़ रुपए आकार का वर्ष 2026-2027 का राज्य बजट प्रस्तुत किया जिसमें राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) बढ़कर 21 लाख 52 हजार 100 करोड़ होने की संभावना हैं जबकि 24 हजार 313 करोड़ 93 लाख रुपए के राजस्व घाटे का अनुमान हैं।

भजनलाल सरकार के प्रस्तुत इस तीसरे बजट अनुमानों में तीन लाख 25 हजार 740 करोड़ 14 लाख रुपए की राजस्व प्राप्तियां, तीन लाख 50 हजार 54 करोड़ सात लाख रुपए का राजस्व व्यय एवं राजकोषीय घाटा 79 हजार 492 करोड़ 52 लाख रुपए जो जीएसडीपी का 3.69 प्रतिशत हैं।

श्रीमती दियाकुमारी ने बजट भाषण में आत्मनिर्भर विकसित राजस्थान- 2047 की परिकल्पना की कार्ययोजना के लिए दस स्तम्भ बताये जिनमें अव-संरचना का विस्तार, नागरिक सुविधाओं से गुणवत्तायुक्त जीवन स्तर में वृद्धि, औद्योगिक विकास एवं निवेश को प्रोत्साहन, मानव संसाधन का सशक्तीकरण, सुदृढ़ सामाजिक सुरक्षा प्रणाली, पयट्रन, कला एवं सांस्कृतिक धरोहर, सुशासन एवं डिजिटल परिवर्तन, कृषि विकास एवं किसानों का कल्याण, हरित विकास एवं पर्यावरणीय सततता और 2047 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर की मजबूत अर्थव्यवस्था शामिल है। इस दौरान जनहित की कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई तथा आमजन, किसानों, श्रमिकों, युवाओं एवं उद्यमियों पर कर के भार को यथासंभव न्यूनतम रखने का विजन रखा गया हैं।

उन्होंने कहा कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को सुगम बनाने के लिए लगभग एक हजार 800 करोड़ रुपये की लागत से स्टेट हाइवे, आरओबी, आरयूबी, फ्लाईओवर, एलिवेटेड रोड, पुल आदि के निर्माण, मरम्मत एवं उन्नयन के काम कराये जायेंगे। नॉन-पेचेबल एवं क्षतिग्रस्त सड़कों के लिए एक हजार 400 करोड़ रुपये तथा मिसिंग लिंक सड़कों के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान एवं आगामी वर्ष 250 अटल प्रगति पथों के 500 करोड़ रुपये की लागत के कार्य हाथ में लिये जाना प्रस्तावित किया गया।

इसी तरह विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों एवं लोजिस्टिक पार्क के पहुंच मार्गों के विकास के लिए 400 करोड़ रुपये का व्यय, आगामी वर्ष भी मानसून उपरान्त सड़कों की मरम्मत के लिए 500 करोड़ रुपये, आरओबी एवं आरयूबी पर 920 करोड़ रुपये से अधिक का व्यय, आगामी दो वर्षों में एक हजार किलोमीटर लम्बाई से अधिक की सड़कों को राज्य राजमार्गों में एवं दो हजार किलोमीटर लम्बाई से अधिक की सड़कों को मुख्य जिला मार्गों में क्रमोन्नत, लगभग 500 किलोमीटर लम्बाई के स्टेट हाइवे मय पुलिया एवं बाईपास दो हजार 700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित, राष्ट्रीय, राज्य राजमार्गों एवं शहरों में सुदृढ़ इंटेलीजेंट ट्राफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के लिए चरणबद्ध रूप से लगभग दो हजार कैमरे 100 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किए जायेंगे।

इसी तरह पेयजल के संबंध में मुख्यमंत्री जल जीवन मिशन (शहरी) योजना का दायरा बढ़ाते हुए पांच हजार करोड़ रुपये का व्यय कर चरणबद्ध रूप से पेयजल आधारभूत संरचना सम्बन्धी कार्य प्रस्तावित किया गया।

अमृत 2.0 योजना के तहत आगामी वर्ष तीन लाख पेयजल कनेक्शन, एक हजार 92 गांवों की लगभग 20 लाख आबादी को बीसलपुर से पेयजल का आपूर्ति स्तर बेहतर करने के लिए सूरजपुरा से चाकसू तक नवीन ट्रांसमिशन लाइन (टीमए-II) सम्बन्धी कार्य 650 करोड़, आगामी वर्ष 600 ट्यूब वेल एवं एक हजार 200 हैंडपंप लगाये जाना प्रस्तावित, सशक्त जल प्रबंधन की दृष्टि से जयपुर में सेंटर एक्सीलेंस की स्थापना, 10 करोड़ बयूरो आफ वाटर यूज एफीसियंसी की स्थापना कर जयपुर में एचसीएम रीपा, सचिवालय एवं जल भवन में पायलट बेसिस पर पेयजल सुविधा तथा नॉन डोमेस्टिक एवं औद्योगिक इकाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के दृष्टिगत राजस्थान स्टेट वाटर पाॅलिसी प्रस्तावित किया गया।

इसी प्रकार प्रदेश में विद्युत तंत्र के और अधिक विस्तार एवं सुदृढीकरण के लिए 220 केवी के छह, 132 केवी को तेरह तथा 33 केवी के 110 जीएसएस का निर्माण, बीकानेर में मेहरासर-दीनसर-बराला व सवाईसर-करणीसर भाटियान-बिकोलोई तथा जैसलमेर में राघवा सेहुआ क्षेत्र में लगभग चार हजार 830 मेगावॉट क्षमता के सौर पार्कों का विकास ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से किया जायेगा।

राज्य के नगर निकायों में सात लाख स्ट्रीट लाइट, पंचगौरव योजना के अन्तर्गत आगामी वर्ष, जिलों में आधारभूत संरचना, पर्यटन उन्नयन, सांस्कृतिक संरक्षण, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग तथा नवाचार आधारित परियोजनाओं के लिए 150 करोड़ रुपये व्यय, स्थानीय निकायों एवं राजकीय उपक्रमों के लिए राज-सेतु (राजस्थान स्ट्रक्चर्ड इनेबलर फोर ट्रांसफोरमेटिव अर्बन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग) फंड प्रस्तावित।

औद्योगिक क्षेत्र एवं आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए लैंड एग्रीगेशन के विकल्प, समस्त संभाग मुख्यालयों पर प्लग एंड प्ले फेसिलिटी फोर स्माल एंड माइक्रो एंटरप्राइजेज, आगामी वर्ष 350 करोड़ रुपये। माटी कला से जुड़े कलाकारों के उत्थान के लिए आगामी वर्ष पांच हजार इलेक्ट्रिक चाक मशीने उपलब्ध कराई जायेगी।

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