जयपुर, 17 सितम्बर (वार्ता) राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर खंडपीठ ने राजस्थान विश्वविद्यालय और पोदार प्रबंधन संस्थान में शिक्षकों की कमी और गिरते शैक्षणिक स्तर को लेकर दायर रिट याचिका पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।

न्यायमूर्ति इंद्रजीत सिंह और न्यायमूर्ति संदीप रावत की पीठ ने पोदार प्रबंधन संस्थान एल्युमनाई सोसायटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार, कुलाधिपति, कुलपति एवं डीन, राजस्थान विश्वविद्यालय और डीन, पोदार प्रबंधन संस्थान को नोटिस जारी किये हैं।

याचिकाकर्ता संस्था की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीप रस्तोगी एवं अधिवक्ता देवेश यादव ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि राजस्थान विश्वविद्यालय और पोदार प्रबंधन संस्थान में पिछले कई वर्षों से शिक्षकों के स्वीकृत पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। याचिका में इन रिक्तियों के कारण शैक्षणिक स्तर प्रभावित होने की बात कही गयी है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, राजस्थान विश्वविद्यालय में एक मई 2026 की स्थिति में शिक्षकों के कुल 949 स्वीकृत पद हैं। इनमें 61 प्रोफेसर, 135 एसोसिएट प्रोफेसर और 753 सहायक प्रोफेसर के पद शामिल हैं। इसके मुकाबले वर्तमान में केवल दो प्रोफेसर, 19 एसोसिएट प्रोफेसर और 362 सहायक प्रोफेसर कार्यरत बताये गये हैं। इस प्रकार करीब 566 स्वीकृत पद लंबे समय से रिक्त होने का दावा किया गया है।

याचिका में कहा गया कि शिक्षकों के पद रिक्त रहने से शिक्षा के साथ-साथ शोध कार्य और नये पाठ्यक्रमों के संचालन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि स्वीकृत पद होने के बावजूद नियमित नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं और अतिथि, अंश कालीन और अस्थायी शिक्षकों के माध्यम से काम चलाया जा रहा है।

पोदार प्रबंधन संस्थान में भी स्वीकृत नौ शिक्षकों के पदों के मुकाबले केवल एक एसोसिएट प्रोफेसर की नियमित नियुक्ति होने और शेष आठ पदों पर अंशकालीन और अतिथि संकाय के माध्यम से अध्यापन कराए जाने का दावा याचिका में किया गया है।

उच्च न्यायालय ने नोटिस जारी करते हुए संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है और पूछा है कि राजस्थान विश्वविद्यालय एवं पोदार प्रबंधन संस्थान में नियमित शिक्षकों की भर्ती क्यों नहीं की जा रही है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित